यूपी सरकार ने अफसरों को जारी किए निर्देश, जनप्रतिनिधियों के प्रति व्यवहार में बर्दाश्त नहीं होगी लापरवाही

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश सरकार ने सांसदों और विधायकों के प्रति अधिकारियों के व्यवहार को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या असम्मानजनक आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों का समयबद्ध निस्तारण और संवाद के दौरान शालीनता व पारदर्शिता बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सभा की विशेषाधिकार समिति के 80 प्रतिवेदन में यूपी के अधिकारियों को लेकर हुई शिकायतों पर केंद्र सरकार से आई आपत्तियों पर बुधवार को प्रमुख सचिव जे.पी. सिंह-II द्वारा जारी शासनादेश में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।

शासनादेश के अनुसार, संसद और राज्य विधानमंडल के सदस्य लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, इसलिए उनके साथ शिष्टाचारपूर्ण, संवेदनशील और त्वरित व्यवहार सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों और संचार का समयबद्ध निस्तारण किया जाए तथा अनावश्यक विलंब से बचा जाए।

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सांसद या विधायक द्वारा जानकारी मांगी जाती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। किसी भी पत्राचार का जवाब निर्धारित समयसीमा में देना होगा और यदि देरी की संभावना हो तो अंतरिम सूचना देना अनिवार्य होगा। सरकार ने अधिकारियों को यह भी हिदायत दी है कि जनप्रतिनिधियों से संवाद के दौरान शालीनता और पारदर्शिता बनाए रखें। बैठकों, कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में उन्हें उचित सम्मान और प्रोटोकॉल के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा, शासनादेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की शिकायत या संवाद को नजरअंदाज करना गंभीर माना जाएगा। फोन, संदेश या अन्य माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का भी समय पर संज्ञान लेना होगा। सरकार ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि इन दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, अनुपालन की निगरानी भी की जाएगी और उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

क्या हैं प्रमुख निर्देश

• सांसद-विधायकों के पत्रों का समयबद्ध जवाब

• सूचना उपलब्ध कराने में प्राथमिकता

• शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य

• देरी होने पर अंतरिम सूचना देना जरूरी

क्यों जरूरी हैं निर्देश

• लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका

• प्रशासन और जनता के बीच सेतु का काम

• पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल

ये भी पढ़ें : 
मुख्यमंत्री योगी बोले- 9 साल में बदली तस्वीर, अब निवेश, रोजगार और इनोवेशन का बना केंद्र उत्तर प्रदेश 

 

 

 

 

 

 

संबंधित समाचार