धूमकेतु के लिए रोमांचक माह अप्रैल

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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अप्रैल माह धूमकेतु दर्शन के लिए एक रोमांचक समय होगा, क्योंकि इस महीने में कम से कम दो प्रमुख धूमकेतु नग्न आंखों से या दूरबीन की मदद से दिखाई दे सकते हैं। ये धूमकेतु लंबी अवधि के (लॉन्ग-पिरियड) और आवर्ती (पिरियडिक) प्रकार के हैं। मुख्य रूप से दो धूमकेतु सी/2026 ए1 (मैप्स) और सी/2025 आर3 (पैनस्टार्स), जिनकी चमक अपेक्षाकृत अधिक होने की संभावना है। इसके अलावा, 10पी/टेम्पेल 2 जैसे अन्य धूमकेतु दूरबीन से दिखाई दे सकते हैं, लेकिन वे कम चमकीले होंगे। ध्यान दें कि धूमकेतु की चमक मौसम, वायुमंडलीय स्थितियों और उनके व्यवहार पर निर्भर करती है, इसलिए पूर्वानुमान बदल सकते हैं। भारत (उत्तर गोलार्ध) से देखने के लिए सामान्य दिशा और समय पर फोकस करना आवश्यक है।- डॉ. इरफान ह्यूमन, एसोसिएट प्रोफेसर/विज्ञान लेखक

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सी/2026 ए1 (मैप्स) - संग्रेजिंग धूमकेतु

यह धूमकेतु 13 जनवरी, 2026 को चिली के अमैक्स1 वेधशाला में चार खगोलशास्त्रियों द्वारा खोजा गया। यह क्रूट्ज संग्रेजर समूह का सदस्य है, जो सूर्य के बहुत निकट से गुज़रने वाले धूमकेतु हैं। यह अब तक का सबसे पहले खोजा गया इनबाउंड क्रूट्ज धूमकेतु है (पेरिहेलियन से 11.5 सप्ताह पहले)। पेरिहेलियन एक खगोलीय अवधारणा है, जो सूर्य-केंद्रित कक्षाओं (जैसे ग्रहों, धूमकेतुओं या अन्य वस्तुओं की कक्षा) से संबंधित है। यह वह बिंदु है, जहां कोई वस्तु (जैसे पृथ्वी या धूमकेतु) अपनी कक्षा में सूर्य के सबसे निकट पहुंचती है। पेरी का अर्थ सबसे निकट और हेलियन का अर्थ सूर्य होता है। अर्थात सूर्य के चारों ओर घूमने वाली वस्तुओं की कक्षा आमतौर पर अंडाकार (एलिप्टिकल) होती है, न कि पूरी तरह गोलाकार। इसलिए इन पिंडों की दूरी हमेशा एक समान नहीं रहती।

संग्रेजिंग धूमकेतु के पेरिहेलियन की बात करें, तो 4 अप्रैल, 2026 को यह सूर्य की सतह से मात्र 7,48,000 किलोमीटर (4,65,000 मील) की दूरी पर रहेगा। यह सूर्य के व्यास का आधा हिस्सा जितना निकट है। इसकी अपेक्षित चमक की बात करें, तो यदि यह टूटा नहीं, तो इसकी चमक -4 मैग्निट्यूड तक पहुंच सकती है (शुक्र ग्रह जितनी चमकीली)। इससे पहले मार्च के अंत में बड़े शौकिया दूरबीनों से 13 मैग्निट्यूड पर दिखाई देगी, लेकिन अप्रैल में तेजी से चमक बढ़ेगी। लंबी पूंछ विकसित हो सकती है।

अप्रैल में सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में मध्य-ट्वाइलाइट (अर्ध-अंधेरे) में दिखाई दे सकता है। दक्षिणी गोलार्ध में मार्च के अंत से ही दिखना शुरू हो सकता है, लेकिन उत्तर भारत से अप्रैल में पश्चिम क्षितिज पर निम्न ऊंचाई पर रहेगा। अप्रैल के मध्य के बाद यह सूर्य के करीब होने के कारण इसे देखना कठिन हो जाएगा।

सूर्यास्त के तुरंत बाद (लगभग 6-7 बजे आईएसटी) पश्चिम की ओर देखें, जहां यह शुक्र ग्रह के आसपास होगा। 8 अप्रैल को शुक्र के बहुत पास दिखाई दिया। नग्न आंखों से या छोटी दूरबीन से पूंछ दिख सकती है, लेकिन सूर्य के करीब होने से इसका दृश्यावलोकन कठिन होगा। इसे देखने के लिए अवरोध-रहित क्षितिज चुनें। यदि इस धूमकेतु की चमक -4 तक पहुंची, तो दिन के उजाले में भी दिख सकता है। संभावित जोखिम यह है कि सूर्य के निकट गर्मी और गुरुत्वाकर्षण से यह पूरी तरह टूट सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो चमक कम हो जाएगी। फिर भी यदि बचा रहा, तो सूर्य के करीब होने से इसे देखना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

संग्रेजिंग धूमकेतु के पेरिहेलियन की बात करें, तो 4 अप्रैल, 2026 को यह सूर्य की सतह से मात्र 7,48,000 किलोमीटर (4,65,000 मील) की दूरी पर रहेगा। यह सूर्य के व्यास का आधा हिस्सा जितना निकट है। इसकी अपेक्षित चमक की बात करें, तो यदि यह टूटा नहीं, तो इसकी चमक -4 मैग्निट्यूड तक पहुंच सकती है (शुक्र ग्रह जितनी चमकीली)। इससे पहले मार्च के अंत में बड़े शौकिया दूरबीनों से 13 मैग्निट्यूड पर दिखाई देगी, लेकिन अप्रैल में तेजी से चमक बढ़ेगी। लंबी पूंछ विकसित हो सकती है।

अप्रैल में सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में मध्य-ट्वाइलाइट (अर्ध-अंधेरे) में दिखाई दे सकता है। दक्षिणी गोलार्ध में मार्च के अंत से ही दिखना शुरू हो सकता है, लेकिन उत्तर भारत से अप्रैल में पश्चिम क्षितिज पर निम्न ऊंचाई पर रहेगा। अप्रैल के मध्य के बाद यह सूर्य के करीब होने के कारण इसे देखना कठिन हो जाएगा।

सूर्यास्त के तुरंत बाद (लगभग 6-7 बजे आईएसटी) पश्चिम की ओर देखें, जहां यह शुक्र ग्रह के आसपास होगा। 8 अप्रैल को शुक्र के बहुत पास दिखाई दिया। नग्न आंखों से या छोटी दूरबीन से पूंछ दिख सकती है, लेकिन सूर्य के करीब होने से इसका दृश्यावलोकन कठिन होगा। इसे देखने के लिए अवरोध-रहित क्षितिज चुनें। यदि इस धूमकेतु की चमक -4 तक पहुंची, तो दिन के उजाले में भी दिख सकता है। संभावित जोखिम यह है कि सूर्य के निकट गर्मी और गुरुत्वाकर्षण से यह पूरी तरह टूट सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो चमक कम हो जाएगी। फिर भी यदि बचा रहा, तो सूर्य के करीब होने से इसे देखना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

10 पी/टेंपेल 2 एक आवर्ती धूमकेतु है, जिसकी कक्षीय अवधि 5.5 वर्ष है। इसकी चमक 12 मैग्निट्यूड, शाम और सुबह के आकाश में (ऊंचाई 11-44 डिग्री) पर ओफ्यूकस तारामंडल में दिखाई देगा। यह दूरबीन से ही दिखेगा, नग्न आंखों से नहीं, क्योंकि इसका चरम अगस्त 2026 में होगा। इसे देखने के लिए शाम को पश्चिम या सुबह पूर्व दिखा में खोजें। एक अन्य धमकेतु सी/2024 ई1 (विएरझोस), जिसका 10 मैग्निट्यूड होगा, शाम में दिखाई देगा, लेकिन ये कम उल्लेखनीय हैं और शौकिया खगोलविदों के लिए यह भी दूरबीनों से दृष्टिगोचर होगा।