एनिवर्सरी 2026
एनिवर्सरी एक पॉलिटिकल थ्रिलर के रूप में प्रस्तुत की गई फिल्म है, लेकिन उच्च रेटिंग और आकर्षक नाम के बावजूद यह दर्शकों को भ्रमित कर सकती है। कहानी एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और उसके होटलियर पति के सुखी परिवार से शुरू होती है। उनकी शादी की सालगिरह पर बेटा अपनी मंगेतर से मिलवाता है, जो कभी उसकी मां की छात्रा रह चुकी होती है। धीरे-धीरे खुलासा होता है कि यह युवती बेहद क्रांतिकारी विचारधारा की समर्थक रही है, जिसे जनतंत्र विरोधी गतिविधियों के कारण विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया था और इसमें मां की भी भूमिका थी।
संघर्ष तब गहराता है, जब उस युवती की लिखी किताब “The Change” लोकप्रिय हो जाती है और उसके विचार समाज में व्यापक राजनीतिक परिवर्तन की लहर पैदा करते हैं। मां, जो यथास्थितिवादी सोच रखती है, इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाती और परिवार के भीतर वैचारिक टकराव तेज हो जाता है। फिल्म राजनीति, विचारधाराओं के टकराव और उनके पारिवारिक रिश्तों पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाने की कोशिश करती है। यह भी दर्शाती है कि उम्र, जड़ता, भावनात्मक जुड़ाव और मानसिक द्वंद्व किस तरह व्यक्ति की सोच को प्रभावित करते हैं।
हालांकि फिल्म एक डिस्टोपियन (काल्पनिक) परिवेश में आधारित है, जहां पात्र और उनका व्यवहार काफी असामान्य और अतिरंजित प्रतीत होता है। कई स्थितियों में उनकी प्रतिक्रियाएं अप्रत्याशित लगती हैं, जिससे कहानी से जुड़ाव कमजोर हो जाता है। कुल मिलाकर, एनिवर्सरी (2026) एक गंभीर विषय उठाती है, लेकिन उसकी प्रस्तुति उतनी प्रभावशाली नहीं बन पाती। यह फिल्म यह भी याद दिलाती है कि रेटिंग्स हमेशा किसी फिल्म की वास्तविक गुणवत्ता का सही पैमाना नहीं होतीं।-समीक्षक-ब्रज राज नारायण सक्सेना
