'राजनीतिक होते हैं गोली चलवाने के 90 फीसदी मामले', अयोध्या गोली कांड पर पहली बार बोले मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष

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Published By Muskan Dixit
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कहा, ढांचा ढहाए जाने के समय गोली न चलाने का कल्याण सिंह ने दिया था लिखित आदेश

अयोध्या, अमृत विचार: राम मंदिर आंदोलन के दौरान सन् 1990 में कारसेवकों पर गोली चलवाने को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने शुक्रवार को पहली बार मुंह खोला। उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलाए जाने के साथ ही विवादित ढांचा ढहाए जाने के समय की बात भी कही। कहा कि गोली चलवाने के 90 फीसदी मामले राजनीतिक होते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में 10 फीसदी राय मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी की होती है। उन्होंने मंदिर से जुड़ी जानकारियां दी।

प्रदेश में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार में नृपेंद्र प्रमुख सचिव स्तर के अफसर थे। श्री राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही वह विपक्ष के निशाने पर आ गए थे। भाजपा सरकार पर गोली चलवाने वाले अफसर को मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष बनाए जाने का आरोप लगा था। इसके बाद लोकसभा चुनाव में श्रावस्ती से उनके बेटे साकेत मिश्र को टिकट दिए जाने के समय विपक्ष ने भी घेरा। इसे मुद्दा बनाया।

जिले के पत्रकारों को शुक्रवार को श्री राम मंदिर दिखाने के लिए ले जाया गया था। वहां पत्रकारों ने मुलायम सिंह यादव के शासन काल में अयोध्या में कारसेवकों पर हुए गोली कांड के आरोप के मुद्दे पर सवाल उठाया। कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी इस पर सवाल उठाते रहे हैं तो नृपेंद्र मिश्र ने शायद पहली बार मुंह खोला। कहा कि वह मुलायम सिंह यादव सरकार में प्रमुख सचिव थे और कल्याण सिंह सरकार में भी प्रमुख सचिव थे। कहा कि अखिलेश यादव देश के सम्मानित राजनेता के सुपुत्र हैं, उन्हें तो सारी जानकारी होगी।

बोले कि ऐसे निर्णय प्रमुख सचिव स्तर के नहीं होते। ऐसे निर्णय 90 फीसदी राजनैतिक होते हैं। इसमें 10 फीसदी राय गृह सचिव, मुख्य सचिव और डीजी पुलिस की होती है। उन्होंने सन् 1992 में विवादित ढांचा ढहाए जाने के समय का जिक्र करके इसकी पुष्ट कर दी। कहा कि मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने भी पत्रावली प्रस्तुत की गई थी। कहा गया कि अयोध्या में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। स्व. कल्याण सिंह ने सीएम के रूप में पत्रावली पर ही आदेश लिख दिया कि कुछ भी हो लेकिन गोली नहीं चलेगी।

उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण पर अब तक लगभग 1800 से 2000 करोड़ के बीच धनराशि खर्च हो चुकी है। जो निर्माण हुए थे उन्हें श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को हैंड ओवर कर दिया गया है। छोटे मोटे 19 काम हैं। इन्हें भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। काम पूरा होने के बाद 30 जून तक सभी कार्यदायी संस्थाएं बाहर निकल जाएंगी।

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