कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट कांड : मेडीलाइफ अस्पताल का साझेदार रोहन चढ़ा पुलिस के हत्थे, जांच के घेरे में 50 से अधिक हॉस्पिटल
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट कांड की जांच तेज हो गई है। पुलिस अब सोमवार को मुख्य दलाल शिवम काणा का कस्टडी रिमांड लेने के लिए कोर्ट में आवेदन कर सकती है। वहीं, केशवपुरम स्थित मेडीलाइफ अस्पताल के एक संचालक कन्नौज के तिर्वा निवासी रोहन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में रोहन ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं।
एक दिन पहले जेल भेजे गए गाजियाबाद और हापुड़ के दो ओटी टेक्नीशियनों ने कबूल किया कि उन्होंने बीते दिसंबर में मेडीलाइफ अस्पताल में ही एक महिला का किडनी ट्रांसप्लांट किया था। बाद में महिला की हालत बिगड़ने पर दलाल उसे दिल्ली के एक अस्पताल ले गया, जहां उसकी मौत हो गई। जेल भेजे गए दलाल शिवम काणा के मोबाइल में मिली रिकॉर्डिंग में भी प्रयागराज के दूसरे दलाल नवीन पांडेय ने इसी महिला की मौत की जानकारी दी थी। पुलिस जांच में अब तक 50 से ज्यादा निजी अस्पताल इस किडनी सिंडिकेट के घेरे में आ चुके हैं।
आहूजा अस्पताल में गुप्त ट्रांसप्लांट
आहूजा अस्पताल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर का 29 मार्च की देर रात अस्पताल स्टाफ को छुट्टी देकर किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। बिहार के बेगूसराय का एमबीए छात्र आयुष दलालों के जाल में फंसकर अपनी किडनी बेचने आया था। उसकी किडनी का सौदा छह लाख रुपये में तय हुआ, लेकिन उसे सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपये ही दिए गए। यह पूरा मामला 30 मार्च को कल्याणपुर थाने में तब सामने आया, जब आयुष को बकाया पैसे नहीं मिले। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि किडनी ट्रांसप्लांट किसी योग्य डॉक्टर ने नहीं, बल्कि ओटी टेक्नीशियन की टीम ने किया।
ट्रांसप्लांट करने वाली टीम में गाजियाबाद के शांति गोपाल अस्पताल के ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह, नोएडा के सर्वोदय अस्पताल के ओटी मैनेजर राजेश और दिल्ली के उत्तम नगर के ओटी मैनेजर मुद्दसर अली सिद्दकी उर्फ अली शामिल थे। इनके साथ पांच अन्य लोग भी थे। पुलिस ने अब तक आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत कुमार आहूजा, उनकी पत्नी और आईएमए कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा समेत आठ आरोपियों को जेल भेज दिया है।
मेडीलाइफ अस्पताल का खुलासा
आरोपी राजेश ने पूछताछ में बताया कि दिसंबर में वह रेलवे लाइन के किनारे स्थित एक अस्पताल में महिला का ट्रांसप्लांट करने अपनी टीम के साथ आया था। निशानदेही पर यह अस्पताल मेडीलाइफ निकला, जिसे सीएमओ ने तीन महीने पहले सील कर दिया था।
डीसीपी के अनुसार मेडीलाइफ अस्पताल के तीन संचालक हैं। पारुल और आयुष दोनों को मेरठ के डॉ. अफजाल अहमद के कहने पर परवेज नामक कार चालक लेकर आया था। परवेज को ट्रैवल एजेंसी संचालक अंकित ने भेजा था। आहूजा अस्पताल पहुंचने के बाद परवेज कल्याणपुर के सत्यम होटल में ठहरा था। इससे पहले भी वह डॉ. अफजाल को तीन बार आहूजा और मेडीलाइफ अस्पताल ले जा चुका है।
पुलिस की तलाश
डीसीपी ने बताया कि पुलिस की आठ टीमें अब डॉ. अफजाल, डॉ. रोहित, डॉ. वैभव, डॉ. अमित, मेडीलाइफ अस्पताल के दो अन्य साझेदारों और दलाल नवीन समेत गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में लगी हैं। पूरी साजिश टेलीग्राम ग्रुप के जरिए चल रही थी। इस ग्रुप में 643 लोग जुड़े थे, जिनके जरिए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट हो रहे थे। पुलिस अब ग्रुप के सभी सदस्यों की जानकारी जुटा रही है।
कन्नौज और औरैया में छापेमारी
पुलिस अब मेडीलाइफ अस्पताल के बाकी दो साझेदारों-सौरिख के संदीप और औरैया के नरेंद्र-के साथ प्रयागराज के दलाल नवीन पांडेय की तलाश में कन्नौज और औरैया में दबिश दे रही है। नवीन पांडेय पिछले पांच साल से आरोपी डॉ. रोहित से जुड़ा हुआ है। पुलिस सोमवार को शिवम काणा का कस्टडी रिमांड लेने जा रही है, क्योंकि उससे कई अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
