Mission 2027 : मायावती ने कार्यकर्ता से की अपील- यूपी में 5वीं बार सरकार बनाने का लक्ष्य, बूथ स्तर तक मजबूत करें संगठन

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ।  उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने रविवार को लखनऊ में बसपा उत्तर प्रदेश इकाई की बड़ी बैठक में पार्टी संगठन की समीक्षा की। लखनऊ में 12 माल एवेन्यू स्थित प्रदेश कार्यालय में हुई इस विशेष बैठक में पोलिंग बूथ स्तर तक संगठन की जमीनी मजबूती, विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों और जनाधार बढ़ाने पर गहन चर्चा हुई।

 मायावती ने पिछली बैठक के निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट पर संतोष जताया। साथ ही कहा कि देश में चुनाव जिस तरह नई-नई चुनौतियों के बीच हो रहे हैं, उसे देखते हुए पार्टी की तैयारियों को हर स्तर पर और अधिक चुस्त-दुरुस्त व मुस्तैद बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्टी के पक्ष में बढ़ते जन रुझान के चलते यूपी में पांचवीं बार सर्वजन हितैषी सरकार बनाने का मिशनरी लक्ष्य सुनिश्चित करना है। 

बैठक में विधानसभा, जिला एवं स्टेट कमेटी के पदाधिकारियों और पोलिंग बूथ स्तर के प्रमुख प्रभारियों ने भाग लिया। मायावती ने यूपी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि धुरंधर विरोधियों की हर चाल का मुकाबला सन 2007 की तरह ही पूरी तरह से डट कर करना है। प्रत्याशियों के चयन में बरती जा रही सावधानी को उन्होंने देश और जनहित में उचित बताया।

मायावती ने कहा कि कुल मिलाकर 'हाथी पर बटन दबाना है, सत्ता में वापस आना है' के मिशन को पूरा करना है। 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की बीएसपी सरकार एक बार फिर सुनिश्चित करने के लिए पूरे जी-जान से वोट की सुरक्षा करनी है। अपनी इज्जत-आबरू, जान-माल की तरह वोट की हिफाजत करनी है। मायावती ने देश के वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक हालात को दुखद व कड़वा बताया। 

उन्होंने कहा कि बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठ-समर्थक नीति के चलते सबका अहित हो रहा है। सभी सरकारें कल्याणकारी होने का संवैधानिक दायित्व निभाएं तो बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि सरकारें खासकर रोजी-रोटी, शांति-सौहार्द एवं कानून-व्यवस्था जैसे जनहित की जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित करें। यूपी के लोगों को पूरी तरह से आजमाई हुई पार्टी बीएसपी व उसके नेतृत्व पर फिर से भरोसा करना होगा।  

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