गंगाराम की मौत पर रोया पूरा गाँव, नहीं जला घर का चूल्हा, 130 सालों तक तालाब में रहने की क्या है कहानी; NCERT के पाठ्यक्रम में शामिल
गंगाराम की मौत की खबर से पूरा गांव गमगीन हो गया। अंतिम विदाई के दौरान ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। जानिए गंगाराम की मौत से जुड़ी भावुक कहानी और गांव के लोगों की प्रतिक्रिया
अमृत विचार : यु तो आपने ढेरों ऐसी कहानिया सुनी होगी जहा इंसानों का जानवरो से प्यार देखने को मिलता है। और प्यार भी ऐसा जो किसी से छुपा नहीं है फिर चाहे वह कोई भी हो। और कई बार ऐसे भी कहानिया होती है जो सोच से परे होती है आज हम आपको एसी ही एक कहानी बताने वाले है जो न सिर्फ आपको प्रेरित करेगी बल्कि या आपको जीवन का सही मतलब और इंसानों और जानवरों के बीच अनोखे प्यार को भी दर्शाएगा। वैसे तो लोग घर में कुत्ता बिल्ली पालते है और ग्रामीण इलाकों में गाय पलने का चलन है। आज हम आपको पानी के एक ऐसे जीव की कहानी बताने वाले है जिसका इंसानों से बैर है और इसके हमले आये दिन सामने आते रहते है जी हां हम बात कर रहे है पानी में रहने वाले मगरमछ की जो न केवल पानी में रहता है बल्कि पानी में रहकर शिकार भी करता है ये एक ऐसा जानवर है जिसे विज्ञान की भाषा में जलचर कहा जाता है।
क्या है गंगाराम की कहानी
हम बात कर रहे है छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतारा गांव के गंगाराम की जिसकी मौत पर पूरा गाँव रोया। जिसकी मौत के बाद किसी के घर खाना तक नहीं बना। आमतौर पर मगरमछ के हमले इंसानों पर समाने आते है। अभी हाल ही में एक 12 साल के बच्चे को जिसे मगरमछ निगल रहा था यह वीडियो वायरल हुआ था, लेकिन इसके उलट 'गंगाराम' एक शांत स्वभाव वाला मगरमछ था। वह लगभग 130 सालों तक गांव के तालाब में रह रहा था। हालांकि यह किसी सरकारी दस्तावेजों में जिक्र नहीं है। वहा के ग्रामीणों ने ही इसे बताया था। गांगराम के इस शांत स्वाभाव को ग्रामीणों में अलग पहचान बनाई। वह लोगों में काफी पॉपुलर होने लगा। गाँव में रहने वाली कई पीढ़िया इसकी गवाह बनी।
गाँव वालों में काफी पॉपुलर रहा गंगाराम
सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात यह थी कि कभी भी इतने समय तक लोगों के बीच रहकर गंगाराम ने कभी भी किसी पर हमला नहीं किया। गाँव में महिलाये पानी भरती, बच्चे खेलते और किसानों के पशु भी यहाँ आते थे लेकिन गंगाराम की मौजदूगी ने कभी भी किसी को डर का अहसास नहीं होने दिया। गाँव के लोगों को एक अजीब सा विश्वास था। और सालों साल से यही रिश्ता मनुष्य और पशु के बीच कड़ी बनी रही। ये रिश्ता आपसी समझ और भरोसे का आधार पर ही रहा।
गंगाराम की कहानी लोगो को पसंद आई
बावा मोहतरा की ये कहानी गाँव से निकलकर दूर दराज के इलाकों और कई और शहरों तक वायरल होने लगी। इंसानों और एक मांसाहारी वन्यजीव के बीच इस अनोखे रिश्ते को देखने के लिए कई दूसरे शहरों में पहुंचने लगी।लेकिन साल 2019 को गंगाराम की मौत हो गई तो पूरे गाँव में मानो मातम सा छा गया। गाँव के लोगों ने मानों किसी अपने को ही खो दिया हो। और ग्रामीणों ने उसे किसी जंगली जानवर के तरह नहीं बल्कि किसी अपने खास सदस्य की तरह पूरे सम्मान से आखिरी विदाई दी इतना ही नहीं बल्कि पूरे गाँव में उस दिन किसी के घर में चूल्हा तक नहीं जला। गंगाराम की अंतिम विदाई की तस्वीर देशभर के चर्चा का विषय बनी थी। इस अनोखे रिश्ते को पूरे देश में भावुक होकर देखा गया था।
NCERT के नए पाठ्यक्रम में शामिल मनुष्य-वन्य जीव प्रेम की कहानी
शांत स्वभाव वाला मगरमछ 'गंगाराम', जो लगभग 130 सालों तक गांव के तालाब में रहा, किसी पर हमला नहीं किया। जिसकी मौत पर पूरा गांव रोया था। इस अनोखे मनुष्य-वन्य जीव प्रेम की प्रेरणादायक कहानी को अब NCERT के नए पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इस कहानी को अब स्कूली स्टूडेंट को क्लास में पढ़ाया जायेगा। बता दें कि NCERT ने इसे अपने नए सिलेबस में 'My India! A Bond Between Humans and Animals' के टाइटल से शामिल किया है। इस चैप्टर में ये बताया गया है कि किस तरह छत्तीसगढ़ के बावा मोहतरा गांव के लोगों और एक पानी में रहने वाले मगरमछ के बीच विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता का एक अनोखा रिश्ता बनाया था। जो आज के लोगों मे देखें को बहुत कम मिलता है हर कोई बस अपना फायदा देखें में लगा रहता है।
