Monsoon Session 2026 : मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, विधायी एजेंडे पर मंथन; तृणमूल-शिवसेना मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा
मानसून सत्र से पहले सरकार ने नए विधेयकों की रूपरेखा रखी, विपक्ष ने एनसीपीआई को बुलाने और बागी सांसदों के मुद्दे पर जताया विरोध; राम मंदिर चढ़ावा, सोनम वांगचुक और पेपर लीक जैसे मुद्दे भी उठाए
मानसून सत्र से एक दिन पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने आगामी विधायी एजेंडा रखा। तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों और शिवसेना (उबाठा) से जुड़े मामलों पर विपक्ष ने विरोध जताते हुए कुछ देर के लिए बैठक का बहिष्कार किया। बैठक में कई नए विधेयकों के साथ राम मंदिर चढ़ावा, सोनम वांगचुक का अनशन और पेपर लीक जैसे मुद्दे भी उठे।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आरंभ से एक दिन पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) में बगावत से जुड़े मामलों को लेकर पूरे विपक्ष ने कुछ समय के लिए वॉकआउट कर अपना विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के मामले में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अंतिम फैसला अभी लंबित है। ऐसे में इस समूह को नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के रूप में सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करना उचित नहीं था।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
विपक्ष ने किया सांकेतिक बहिर्गमन
बैठक के दौरान विपक्षी नेताओं ने कुछ समय के लिए बहिर्गमन किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि सभी विपक्षी दलों ने एनसीपीआई को बैठक में बुलाए जाने के विरोध में सांकेतिक वॉकआउट किया। उन्होंने कहा कि जब तक लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उन्हें अलग राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देकर बैठक में बुलाना उचित नहीं है।
शिवसेना (उबाठा) ने भी जताई आपत्ति
शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सांवत ने लोकसभा अध्यक्ष द्वारा छह सांसदों को "संबद्धता" दिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कानून में ऐसे शब्द का कोई प्रावधान नहीं है और इसी के विरोध में उनकी पार्टी ने भी बैठक से वॉकआउट किया।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (उबाठा) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी थी। साथ ही, एनसीपीआई में शामिल हुए तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था को भी स्वीकृति दी गई।
राम मंदिर, सोनम वांगचुक और पेपर लीक का मुद्दा भी उठा
सूत्रों के अनुसार विपक्ष ने बैठक में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन, विदेश नीति, पेपर लीक समेत कई अन्य मुद्दे भी उठाए। समाजवादी पार्टी ने घोषणा की कि वह राम मंदिर चढ़ावा मामले को मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाएगी।
मानसून सत्र में पेश होंगे कई अहम विधेयक
सरकार ने आगामी मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले नए विधेयकों की जानकारी भी दी। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश किया जाएगा। इस विधेयक के जरिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन करते हुए राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी सूचीबद्ध है, जिसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है। सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी, जो सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को कर छूट देने से जुड़े अध्यादेश का स्थान लेने वाला विधेयक होगा।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए समूह के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय को भी सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया था। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। प्रत्येक सत्र से पहले आयोजित होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार अपने विधायी कार्यक्रम की जानकारी देती है और सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग का आग्रह करती है।
