UP के हर जिले में लगेंगे 1000+ बायोगैस प्लांट : गोबर से गैस-खाद और कमाई; ग्रामीणों को मिलेगा अनुदान, जानिए सरकार का पूरा प्लान
आईआईटी दिल्ली देगा तकनीकी सहयोग, 15 से अधिक कंपनियां जुड़ने को तैयार, ग्रामीणों को अनुदान
उत्तर प्रदेश सरकार गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में 1,000 से अधिक मिनी बायोगैस प्लांट लगाएगी। IIT दिल्ली तकनीकी साझेदार होगा। योजना से ग्रामीणों को रोजगार, सस्ती ऊर्जा और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश को गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी का राष्ट्रीय मॉडल बनेगी। प्रत्येक जिले में 1,000 से अधिक मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित करने की तैयारी है। इस परियोजना के तहत स्थायी (फिक्स) और पोर्टेबल दोनों तरह के प्लांट लगाए जाएंगे। सरकार ग्रामीणों को प्लांट लगाने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा भी तैयार कर रही है। परियोजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी साझेदार होगा, जबकि 15 से अधिक अग्रणी कंपनियों ने इसके क्रियान्वयन में रुचि दिखाई है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अनुसार इस योजना का उद्देश्य गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ''''रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब'''' के रूप में विकसित करना है। यहां गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी, जैविक खाद और भविष्य में कार्बन क्रेडिट जैसी गतिविधियों की पूरी वैल्यू चेन तैयार की जाएगी।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा, आय और रोजगार के नए स्रोत विकसित होंगे। योजना के तहत एक मिनी बायोगैस प्लांट पर 25 हजार से 40 हजार रुपये तक का खर्च आएगा। आईआईटी दिल्ली प्लांट की तकनीक, स्थापना, संचालन और रखरखाव के साथ युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा। वहीं निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां तकनीकी सहयोग और परियोजना के विस्तार में भागीदारी करेंगी, जिससे आधुनिक तकनीक गांवों तक पहुंचेगी।
IIT दिल्ली देगा तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण
सरकार इस परियोजना के जरिए प्रदेश में ग्रीन टेक्नीशियन की नई पीढ़ी तैयार करने की भी योजना बना रही है। आईआईटी दिल्ली के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को बायोगैस प्लांट लगाने, संचालित करने और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।
बायोगैस प्लांट से तैयार गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में होगा, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण परिवारों का खर्च घटेगा। प्लांट से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल होगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने के साथ प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई मिसाल : अध्यक्ष
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों को प्लांट लगाने के लिए अनुदान देने की योजना पर काम चल रहा है। उनका कहना है कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश को गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी का अग्रणी राज्य बनाने के साथ ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी स्थापित करेगा।
