KGMU Convocation 2026: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले- AI नहीं, डॉक्टर की संवेदना बचाती है जिंदगी
केजीएमयू दीक्षांत समारोह में रक्षामंत्री बोले- तकनीक चिकित्सा में सहायक हो सकती है, लेकिन करुणा और संवेदना का स्थान नहीं ले सकती
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। "मशीनें इलाज में मदद कर सकती हैं, लेकिन मरीज के मन का दर्द नहीं समझ सकतीं।" केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का यह संदेश पूरे संबोधन का केंद्र रहा। उन्होंने नव चिकित्सकों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकें चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला रही हैं, लेकिन डॉक्टर की संवेदना, करुणा और मानवीय स्पर्श ही जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी ताकत है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज से युवा डॉक्टर केवल एक पेशे में नहीं, बल्कि मानव सेवा के सबसे पवित्र दायित्व में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सफेद कोट केवल एक पहचान नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी का प्रतीक है। डॉक्टर अपने पेशे के प्रति लिया गया संकल्प कभी न भूलें, यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी होगी।
उन्होंने अमेरिका के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. पॉल फार्मर का उदाहरण देते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा ही चिकित्सा का सर्वोच्च धर्म है। एक संपन्न व्यक्ति के पास इलाज के कई विकल्प हो सकते हैं, लेकिन गरीब मरीज डॉक्टर के पास सिर्फ उम्मीद लेकर आता है। इसलिए हर मरीज का बिना किसी भेदभाव के समान भाव से इलाज होना चाहिए।
सुषेण वैद्य का उदाहरण देकर समझाया डॉक्टर का धर्म
रक्षामंत्री ने रामचरितमानस का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि युद्ध में लक्ष्मण के घायल होने पर लंका के राजवैद्य सुषेण ने यह नहीं देखा कि मरीज किस पक्ष का है। उन्होंने केवल एक जीवन बचाने को अपना धर्म माना। यही चिकित्सा का वास्तविक दर्शन है और यही हर डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान होनी चाहिए।
मरीज की बात ध्यान से सुनें, वहीं छिपा होता है इलाज
उन्होंने प्रसिद्ध चिकित्सक सर विलियम ऑस्लर का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार बीमारी का सही सुराग मरीज की बातों में ही छिपा होता है। इसलिए डॉक्टरों को जल्दबाजी नहीं, बल्कि धैर्य और संवेदनशीलता के साथ मरीज की बात सुननी चाहिए। राजनाथ सिंह ने डॉक्टरों को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में दिन-रात काम करना पड़ता है, इसलिए योग और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
AI इलाज करेगा, लेकिन भरोसा नहीं दे सकता
रक्षामंत्री ने कहा कि AI, जीन एडिटिंग, सिंथेटिक बायोलॉजी और प्रिसिजन मेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों ने चिकित्सा क्षेत्र की दिशा बदल दी है। फिर भी कोई मशीन किसी मां से यह नहीं कह सकती कि उसका बच्चा जरूर ठीक हो जाएगा और न ही किसी बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उसे भावनात्मक सहारा दे सकती है। यह काम केवल एक संवेदनशील डॉक्टर ही कर सकता है।
उन्होंने केजीएमयू की पहली महिला कुलपति प्रो. डॉ. सरोज यादव गौड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि 79 वर्ष की आयु में पीएचडी में प्रवेश लेकर उन्होंने साबित किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने नव चिकित्सकों से नई तकनीक के साथ निरंतर सीखने और जिज्ञासु बने रहने का आह्वान किया।
समापन में राजनाथ सिंह ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में हर बड़ी खोज किसी ऐसे व्यक्ति ने की, जिसने स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने का साहस किया। उन्होंने नव चिकित्सकों से ज्ञान, सेवा, संवेदना और मानवता के मूल्यों को अपनाकर चिकित्सा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।...
(इनपुड... पंकज द्विवेदी)
