Bareilly News : सीबीगंज आवासीय योजना में अगस्त से शुरू होगा आवंटन
522 हेक्टेयर की योजना में पहले चरण के तहत चार सेक्टरों का होगा विकास, ग्रुप हाउसिंग के बजाय किसानों को प्राथमिकता, ले-आउट में हुआ बड़ा सुधार
बरेली, अमृत विचार। आवास एवं विकास परिषद की सीबीगंज लैंड पूलिंग परियोजना का इंतजार खत्म होने जा रहा है। शासन स्तर पर संशोधित ले-आउट को जुलाई में हरी झंडी मिल जाएगी। अगस्त महीने से भूखंडों के आवंटन शुरू होगा। पहले चरण में कुल चार सेक्टरों को विकसित करने का खाका तैयार किया गया है, जिसमें 40 वर्गमीटर से लेकर 600 वर्गमीटर तक के विभिन्न श्रेणियों के आवासीय प्लॉट शामिल किए गए हैं।
522 हेक्टेयर में विकसित हो रही इस योजना को लेकर पहले मई में एक ले-आउट तैयार किया गया था। जिस पर शासन ने कड़ी आपत्ति जताई थी। क्योंकि उस ले-आउट में किसानों के हक की अनदेखी कर ग्रुप हाउसिंग के लिए ज्यादा जमीन आरक्षित कर दी गई थी। शासन के कड़े रूप और निर्देशों के बाद परिषद ने त्वरित सुधार करते हुए सेक्टर पांच, छह और सात का नया ले-आउट भेजा, जिसमें 70 फीसदी से अधिक भूखंड स्थानीय किसानों के लिए सृजित किए गए हैं। इस बदलाव से 300 से अधिक किसान सीधे लाभांवित होंगे। एक्सईएन राजेंद्र नाथ राम के मुताबिक, संसोधित लेआउट को इसी माह में मंजूरी मिल जाएगी। जिसके बाद अगस्त माह के पहले सप्ताह से भूमि देने वाले किसानों को प्राथमिकता से प्लॉट देकर इस ड्रीम प्रोजेक्ट को तेजी से धरातल पर उतारा जाएगा।
ले-आउट में संशोधन की वजह से हो रही देरी
आवास विकास परिषद की सीबीगंज योजना के लिए पूर्व में तैयार किए गए ले-आउट पर शासन ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। नियमों के विपरीत, इस ले-आउट में स्थानीय किसानों के हितों की अनदेखी कर बड़े बिल्डरों और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े व्यावसायिक भूखंडों को अधिक जगह दे दी गई थी। मामला सामने आने पर आवास आयुक्त के निर्देश पर इसे तत्काल निरस्त कर दोबारा खाका खींचने का निर्देश दिया था। इसके बाद परिषद ने अपनी गलती सुधारते हुए सेक्टर 5, 6 और 7 का नया नक्शा बनाया, जिसमें किसानों के अधिकारों की रक्षा करते हुए छोटे-बड़े आवासीय प्लॉट शामिल किए गए।
क्या है लैंड पूलिंग योजना और किसानों को लाभ
लैंड पूलिंग नीति के तहत किसान अपनी मर्जी से विकास प्राधिकरण या परिषद को अपनी कृषि भूमि सौंपते हैं। इसके बदले में परिषद उस पूरी जमीन को बुनियादी सुविधाओं जैसे चौड़ी सड़कें, सीवर, बिजली और पार्क के साथ सर्वसुविधायुक्त आवासीय कॉलोनी के रूप में विकसित करती है। विकास कार्य पूरा होने के बाद, किसानों को उनकी मूल भूमि के एक निश्चित अनुपात में व्यावसायिक या आवासीय विकसित प्लॉट वापस कर दिए जाते हैं। इससे किसानों को न केवल अपनी जमीन का सही मूल्य मिलता है, बल्कि भविष्य में वहां प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने से बड़ा आर्थिक मुनाफा भी होता है।
