Bilhaur Assembly Election 2027: बिल्हौर में चुनावी सरगर्मी तेज, भाजपा में टिकट की जंग, सपा भी मैदान में; कौन बनेगा सीट का सिरमौर?

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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दो बार से भाजपा के कब्जे वाली बिल्हौर सीट पर कई दावेदार सक्रिय, सपा-कांग्रेस ने भी बढ़ाया जनसंपर्क; 2027 के मुकाबले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज।

कानपुर, अमृत विचारः बारिश ने भले ही मौसम में गर्मी से कुछ राहत दी हो, लेकिन बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी तापमान धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा है। प्रमुख दलों भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा से टिकट के दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए जमीन पर उतर चुके हैं। क्षेत्र से भाजपा के विधायक राहुल बच्चा को अंदरखाने अपने ही दल के दावेदारों से चुनौती मिल रही है।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार बिल्हौर सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, तब बसपा से भाजपा में शामिल हुए भगवती प्रसाद सागर ने बसपा प्रत्याशी कमलेश दिवाकर को करीब 31 हजार वोटों से हराया था। कांग्रेस के साथ गठबंधन के बावजूद सपा से चुनाव लड़े शिवकुमार बेरिया तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके पहले 2012 के चुनाव में सपा की अरुणा कोरी विधायक बनी थीं। उन्होंने बसपा के कमलेश दिवाकर को 15 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी थी l भाजपा के राकेश सोनकर 25,473 मत पाकर तीसरे और कांग्रेस के रामलखन गौतम 22,640 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे थे।

वर्ष 2022 में भाजपा ने निवर्तमान विधायक भगवती सागर का टिकट काटकर कट्टर हिंदुत्व छवि वाले राहुल बच्चा को मैदान में उतारा। उन्होंने 1,23,094 मत लेकर इस सीट पर भाजपा की जीत का सिलसिला बरकरार रखा। उनके मुकाबले सपा की रचना सिंह गौतम को 80,743 वोट मिले। बसपा की मधु सिंह को 31,426 तो कांग्रेस की ऊषा रानी को मात्र 2,510 वोट ही मिले। पिछले पांच चुनाव के नतीजे बताते हैं कि बिल्हौर क्षेत्र में कांग्रेस का ग्राफ निरंतर गिर रहा है, ऐसे में यहां मुख्य टक्कर सपा, बसपा और भाजपा में ही है।

2027 के विधानसभा चुनाव में बिल्हौर सीट पर राजनीतिक हालात थोड़ा बदले नजर आ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि पूर्व विधायक अरुणा कोरी और कमलेश दिवाकर अपने समर्थकों सहित न सिर्फ भाजपा में आ गए हैं, बल्कि इस क्षेत्र से भाजपा के दावेदारों में उनके नाम चर्चा में भी है। फिलहाल अरुणा के समर्थक ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं। हालांकि भाजपा से प्रत्याशियों की दौड़ में पूर्व विधायक राकेश सोनकर का भी नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इस माहौल में भाजपा की स्थानीय गुटबाजी विधायक राहुल बच्चा के सामने चुनौती है l कुछ नेता खामोशी से उनके खिलाफ माहौल बना रहे हैं। वैसे बीते पांच साल में राहुल ने यहां अपनी अच्छी पैठ बनाई है, कई विकास योजनाएं लाए हैं l मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया है। हिंदुत्व के मुद्दे पर मुखर रहते हैं।

उधर, सपा से टिकट के दावेदार नेता भी क्षेत्र में सक्रिय हैं l यदि कांग्रेस से सपा का गठबंधन होता है तो इस सीट पर सपा का दावा ज्यादा मजबूत है। ऐसी स्थिति में चुनाव भी दिलचस्प हो सकता है। लोगों का भी मानना है कि इस बार भी मुकाबला भाजपा और सपा के बीच ही होगा। इस क्षेत्र में दलित और पिछड़े वर्ग के वोटरों की संख्या अधिक है l

भाजपा से यह हैं दावेदार

विधायक राहुल बच्चा के अलावा पूर्व विधायक अरुणा कोरी, राकेश सोनकर, अंजू बाला, स्वप्निल वरुण, कमलेश दिवाकर और मनोज के नाम चर्चा में हैं l वैसे कमलेश दिवाकर रसूलाबाद और स्वप्निल वरुण घाटमपुर क्षेत्र में भी सक्रिय रहकर वहां से भी दावेदारी कर रहे हैं।

दौड़ में सपा व कांग्रेस नेता

सपा से रचना सिंह गौतम, अंकित धानविक और आनंद वर्मा के अलावा कई नेता टिकट की होड़ में हैं l रचना गौतम पिछले चुनाव में 80 हजार से अधिक वोट पाकर दूसरे स्थान पर रही थीं और कुछ महीने पहले वह क्षेत्र के एक स्कूल में पीडीए क्लास लगाकर चर्चा में आई थीं। कांग्रेस से कृपा शंकर शंखवार, नंदराम सोनकर, विकास और बाबू सोनकर के नाम की चर्चा है।

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