UP Education News: कक्षा-कक्ष के अनुभवों से तय होगी नई शिक्षा रणनीति, TLPS Report 2025 जारी

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

स्कूल चलो अभियान और निपुण मिशन पर बड़ा फोकस

लखनऊ में 'पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग' कार्यक्रम के दौरान जारी हुई TLPS Report-2025, कैच-अप लर्निंग, नियमित उपस्थिति, लेखन कौशल और साक्ष्य आधारित शिक्षण पर रहेगा विशेष जोर।

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में बुनियादी शिक्षा सुधारों का अगला चरण अब कक्षा-कक्ष के वास्तविक अनुभवों और बच्चों के अधिगम स्तर के आधार पर तय होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा विभाग ने पहली बार शिक्षकों के अनुभव, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) और निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर मंथन किया।

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मंगलवार को आयोजित ''पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग'' कार्यक्रम में टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने की। इसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ और डायट विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जारी टीएलपीएस-2025 रिपोर्ट में कक्षा 1 और 2 के भाषा एवं गणित शिक्षण, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, शिक्षक प्रशिक्षण और निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। नवंबर-दिसंबर 2024 में बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर और बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार रिपोर्ट में प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, शिक्षक क्षमता विकास और विद्यालय स्तर पर सुधार की जरूरतों को रेखांकित किया गया।

अपर मुख्य सचिव ने एक जुलाई से शुरू हो रहे स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा बाल वाटिका से और छह वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर नहीं रहना चाहिए। कक्षा पांच से छह, आठ से नौ और दस से ग्यारह में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति जरूरी है। लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। साथ ही सत्र की शुरुआत से ही कैच-अप लर्निंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि सीखने में पिछड़ गए विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग मिल सके।

निपुण लक्ष्य और लेखन कौशल सुधारने की पहल

पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि निपुण उत्तर प्रदेश का दायरा अब कक्षा 3 से 5 तक बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षकों से निपुण लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने और परिणाम अभिभावकों के साथ साझा करने को कहा। परख के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने लेखन कौशल में सुधार के लिए विद्यालयों में प्रतिदिन स्वतंत्र पठन और स्वतंत्र लेखन की गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

शिक्षक संकुल बैठकें बनें नवाचार का मंच

अपर मुख्य सचिव ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के प्रभावी उपयोग, विद्यालय प्रबंधन समितियों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक संकुल बैठकों को सफल शिक्षण पद्धतियों और नवाचारों के आदान-प्रदान का मंच बनाया जाए। समापन सत्र में इस बात पर सहमति बनी कि प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, मजबूत शिक्षक क्षमता, सतत अकादमिक सहयोग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी।

यह भी पढ़ेंः UPTET Admit Card 2026: आज डाउनलोड करें टीईटी का एडमिट कार्ड, जानें डायरेक्ट प्रोसेस, एग्जाम पैटर्न और पासिंग मार्क्स

संबंधित समाचार