कानपुर: टेनरी का गंदा पानी मछलियों के लिए बन रहा काल, पोस्टमार्टम में गलफोड़ों में काली गंदगी जमा मिली

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Published By Ankit Yadav
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कानपुर में 12 दिन में दूसरी बार गंगा में मरी मिलीं मछलियां

कानपुर, अमृत विचार। कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र में 12 दिन के भीतर दूसरी बार गंगा में बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिली हैं। बुधवार को वाजिदपुर स्थित डबला बोर्ड के पास पानी में मछलियां उतराती देख स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। इससे पहले 13 जून को बारिश के बाद इसी इलाके में बड़ी संख्या में मछलियां अचेत अवस्था में मिली थीं। लगातार दूसरी घटना ने गंगा में प्रदूषण नियंत्रण और सीवेज प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पोस्टमार्टम में मिला काला तरल

सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग और मत्स्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मरी हुई मछलियों के नमूने एकत्र कर पोस्टमार्टम कराया। जांच के दौरान मछलियों के शरीर से गाढ़ा काला तरल पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेज दी गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अजीत कुमार सुमन ने भी मौके का निरीक्षण किया।

ऑक्सीजन की कमी बनी वजह

जांच के दौरान जिस स्थान पर मछलियां मरी मिलीं, वहां पानी में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर केवल 1.2 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार जलीय जीवों के लिए सामान्य रूप से कम से कम 4 मिलीग्राम प्रति लीटर ऑक्सीजन जरूरी होती है। ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने के कारण मछलियों का श्वसन तंत्र प्रभावित हुआ और उनकी मौत हो गई।

पहले भी सामने आई थी समस्या

13 जून को हुई बारिश के बाद भी इसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मछलियां प्रभावित हुई थीं। उस समय जांच में पता चला था कि वाजिदपुर स्थित तीन एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर दबाव बढ़ने के कारण बिना उपचार का दूषित पानी सीधे गंगा में पहुंच गया था। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सात स्थानों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे।

बारिश और धूप से बिगड़ी स्थिति

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अजीत कुमार सुमन के अनुसार बारिश के दौरान नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में पहुंच गया। बारिश रुकने के बाद पानी का बहाव कम होने से दूषित पानी एक जगह जमा हो गया। इसके बाद तेज धूप के कारण पानी में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हो गई और पानी सड़ने लगा। इसी वजह से बुधवार को फिर बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई।

जांच समिति कर रही पड़ताल

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम सदर, सहायक निदेशक मत्स्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति पूरे मामले की जांच कर रही है। लगातार दूसरी बार हुई इस घटना ने गंगा में प्रदूषण रोकने के इंतजामों और सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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