BJP की नई टीम पर बोले शिवपाल यादव- सपा के 'भगोड़ों' को भाजपा ने संगठन में जगह दी

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Published By Ankit Yadav
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इटावा/लखनऊ, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी ने संगठन में समाजवादी पार्टी छोड़कर गए नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार दूसरे दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।

नई कार्यकारिणी पर उठाए सवाल

अपने विधानसभा क्षेत्र जसवंतनगर में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि भाजपा द्वारा घोषित नई संगठनात्मक टीम में ऐसे कई नेताओं को स्थान दिया गया है, जो पहले समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को दूसरे दल में जाने से पहले अपने पुराने दल और पदों से औपचारिक रूप से इस्तीफा देना चाहिए।

दलबदल की राजनीति का आरोप

सपा नेता ने कहा कि भाजपा अन्य दलों के नेताओं को अपने पक्ष में करने का लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने इसे स्वस्थ राजनीतिक परंपरा के अनुरूप नहीं बताया। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं और संगठन के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए, न कि दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर संगठन खड़ा करना चाहिए।

पीडीए फार्मूले से घबराई भाजपा

भाजपा की नई कार्यकारिणी में ओबीसी नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि भाजपा समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले के प्रभाव से चिंतित है। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से भाजपा सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है।

जनता का समर्थन सबसे अहम

नई कार्यकारिणी में राजनीतिक परिवारों से जुड़े नेताओं को जगह मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता का समर्थन होता है। संगठनात्मक पद महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि की असली पहचान और शक्ति जनता के विश्वास से तय होती है।

राम मंदिर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग

राम मंदिर से जुड़े चंदा और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही धार्मिक और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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