Advocate Indradev Singh Murder : नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता की हत्या में 24 साल बाद दोषी ठहराए गए तीन कातिल
लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष इंद्रदेव हत्याकांड से थर्रा गया था कैसरबाग इलाका
लखनऊ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे इंद्रदेव सिंह की 8 अगस्त की शाम, 2002 को कैसरबाग इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने लखनऊ को हिलाकर रख दिया था। सीबीआई जांच में सामने आया कि सुपारी देकर उनकी हत्या कराई गई थी। इंद्रदेव सिंह की पत्नी नयनतारा सिंह ने इस मामले में कैसरबाग थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
अृत विचार, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता एडवोकेट इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में 24 साल बाद कोर्ट का फैसला आया है। सीबीआई कोर्ट ने इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। इसमें बृजेश यादव, विक्रम यादव उर्फ कल्लू और पन्ना सिंह शामिल हैं। सुनवाई के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सजा का ऐलान 7 जुलाई को होगा। लखनऊ में वर्ष 2002 में एडवोकेट इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
कैसरबाग में मारी थी गोली
लखनऊ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे इंद्रदेव सिंह की 8 अगस्त की शाम, 2002 को कैसरबाग इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने लखनऊ को हिलाकर रख दिया था। इंद्रदेव सिंह की पत्नी नयनतारा सिंह ने इस मामले में कैसरबाग थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने पति की हत्या में सुरेश वर्मा, सुषमा वर्मा, सुरजन वर्मा, रामकुमार वर्मा के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि बाद में इस हाईप्रोफाइल केस की जांच सीबीआई को सांप दी गई थी।
सीबीआई जांच में खुली परतें
यूपी सरकार की सिफारिश पर जब केस सीबीआई के पास पहुंचा, तो इंद्रदेव हत्याकांड की परतें खुलीं। जांच में सामने आया कि इंद्रदेव की हत्या में मन्नालाल गुप्ता, वेदप्रकाश गुप्ता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना, पन्ना सिंह और छोटेलाल शामिल थे।
तीन आरोपियों की हो चुकी मौत
इंद्रदेव हत्याकांड में दोष सिद्ध होने में 24 साल बीत गए। इस दौरान तीन आरोपियों की मौत भी हो गई। इंद्रदेव की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आए मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश गुप्ता और छोटेलाल उर्फ छोटू की इस बीच मौत हो चुकी है।
सुपारी देकर कराई थी हत्या
सीबीआई जांच में सामने आया कि इंद्रदेव की हत्या मन्नालाल गुप्ता ने कराई थी। मन्नालाल लेखपाल थे। इंद्रदेव सिंह ने मंडियाव में अपनी 5 बीघा जमीन पर प्लॉटिंग शुरू की थी। इसकी जिम्मेदारी उन्होंने तत्कालीन लेखपाल मन्नाल गुप्ता को सौंपी। पॉपर्टी की रकम को लेकर इंद्रदेव और मन्नालाल में अनबन हो गई। इसलिए क्योंकि इंद्रदेव को पता चला कि मन्नालाल रुपयों में हेराफेरी कर रहे हैं। विवाद के बाद मन्नालाल गुप्ता ने इंद्रदेव की हत्या की साजिश रची। उन्होंने हत्या के लिए बदमाशों को सुपारी दी। शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया ने कैसरबाग में शाम के वक्त इंद्रदेव की गोली मारकर हत्या कर दी।
24 साल बाद इंसाफ
इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड में न्याय मिलने में 24 साल का लंबा समय लग गया। इस बीच मुख्य साजिशकर्ता मन्नालाल गुप्ता के साथ दो और आरोपियों की मौत हो गई। इंद्रदेव सिंह की बेटी लक्ष्मी सिंह आईपीएस अधिकारी बन गईं और अपने पिता के कातिलों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष करती रहीं। परिवार के लंबे संघर्ष और धैर्य के बाद आखिरकार उन्हें इंसाफ मिल गया। अब 7 जुलाई को कोर्ट तीन जीवित बचे दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगा।
