Lucknow News : कागजों में सख्ती, जमीन पर समझौता... राजधानी में बिना फायर एनओसी चल रहे 689 निजी अस्पताल
लखनऊ, अमृत विचार : शहर में संचालित 900 से अधिक पंजीकृत निजी अस्पतालों में केवल 211 अस्पतालों के पास ही फायर एनओसी है और 689 से अधिक अस्पताल बिना अग्निशमन विभाग की मंजूरी के संचालित हो रहे हैं। इससे हजारों मरीज और उनके तीमारदार हर दिन आग जैसी संभावित दुर्घटनाओं के खतरे के बीच इलाज कराने को मजबूर हैं। बिना पंजीकरण संचालित अस्पतालों की संख्या 5000 से भी अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग के छापे में अस्पतालों में फायर एनओसी न मिलने पर अधिकारियों ने नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली। बीते वर्ष 50 से अधिक अस्पतालों को नोटिस थमाए गए, लेकिन किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इनमें ज्यादातर अस्पताल ग्रामीण क्षेत्रों के हैं।
कागजों में सख्ती, जमीन पर समझौता
नियमों के मुताबिक अस्पताल पंजीकरण के लिए फायर और बायोमेडिकल वेस्ट एनओसी अनिवार्य है। अस्पताल में आपात निकासी के लिए दो गेट भी होने चाहिए। सभी मानकों की जांच के बाद ही पंजीकरण दिया जाना चाहिए। लेकिन सूत्रों के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारियों और अस्पताल संचालकों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर अस्पतालों का संचालन जारी है। जांच के दौरान कमियां निकालने के बाद उन्हें जल्द दूर कराने के नाम पर अस्पतालों को मौखिक रूप से संचालन की छूट दे दी जाती है।
अस्पतालों में हाल ही में हुई घटनाएं
- 14 अप्रैल 2025 : लोकबंधु अस्पताल की दूसरी मंजिल पर शॉर्ट सर्किट से आग, एक की मौत।
- 18 दिसंबर 2023 : पीजीआई की ओटी में वेंटिलेटर में आग लगने से दो लोगों की मौत।
- 2 जनवरी 2024 : सिविल अस्पताल की पैथोलॉजी में आग लगने से भगदड़।
- जुलाई 2017 : केजीएमयू में भीषण आग, पांच लोगों की जान गई।
निजी अस्पतालों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। कमियां मिलने पर नोटिस देकर जवाब मांगा जाता है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संचालन पर रोक लगाई जाती है... डॉ. एपी सिंह,नोडल अफसर निजी अस्पताल।
