Kanpur News : समृद्ध किसान व विकसित भारत के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी, कानपुर में बोले सीएम योगी

Amrit Vichar Network
Edited By Deepak Mishra
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कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कैलाश भवन सभागार में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राकृतिक खेती को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत घटाने और स्वस्थ समाज के निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा कृषि से जुड़ी संस्थाओं का आह्वान करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाना चाहिए जिससे विकसित भारत का संकल्प पूरा हो सके। 

सीएम ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसान समृद्ध बन सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि परंपरा में गाय का विशेष महत्व रहा है और गौ-आधारित प्राकृतिक खेती हमारी कृषि संस्कृति की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसान रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर भारी खर्च कर रहे हैं। यदि किसान प्राकृतिक खेती की ओर लौटें तो खेती की लागत में कमी आएगी, खेत पहले की तरह उपजाऊ बनेंगे। 

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से लोगों की सेहत पर भी खराब असर हो रहा है। नई-नई बीमारियों से होने वाले नुकसान से लोगों की चिंता बढ़ रही है। कहा कि रसायनिक खेती से होने वाले दुष्प्रभाव के इलाज के लिए अस्पतालों में भी राशि खर्च करनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार 34 जनपदों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। गंगा तटवर्ती 27 जिलों और बुंदेलखंड के सात जिलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जहां किसानों को इसका लाभ भी मिल रहा है। 

सीएम ने कहा कि किसानों की उपज के लिए उचित मूल्य दिलाने के लिए कृषि मंडियों को अपग्रेड किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग को मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 7700 से अधिक गौशालाओं में 14 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं और मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के माध्यम से गोवंश संरक्षण तथा किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। 

मंत्री शाही बोले- रासायनिक खादों से बिगड़ रही मिट्टी की सेहत

वहीं, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की सेहत लगातार बिगड़ रही है। उत्तर प्रदेश की मिट्टी की जैविक गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है, जो कृषि के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि यदि धरती को फिर से शस्य श्यामलाम् बनाना है तो प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा। कृषि मंत्री ने कहा कि रसायनों के अत्यधिक उपयोग से जलवायु परिवर्तन की समस्या भी बढ़ रही है तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। 

उन्होंने विशेष रूप से बुंदेलखंड के जिलों में प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया तथा कृषक दुर्घटना बीमा योजना के लाभार्थियों को सहायता राशि के चेक भी वितरित किए।

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