ट्रस्ट ने की सर्व समाज को साधने की कोशिश, चढ़ावा प्रकरण बाद ट्रस्टी कृष्ण मोहन के जरिए कई लक्ष्य साधा
नाराजगी दूर करने के लिए कई मुद्दों पर की चर्चा
राजेंद्र कुमार पांडेय, अयोध्या, अमृत विचार: श्री राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण के बाद हुई ट्रस्ट की बैठक के जरिए सर्व समाज को साधने की कोशिश की गई। ट्रस्टी कृष्ण मोहन के जरिए कई लक्ष्य को साधने की कोशिश की गई। साथ समाज में समानता, व्यवहार और एकता का संदेश देने की कोशिश की गई।
ट्रस्टी कृष्ण मोहन एक आईएफएस अफसर हैं। वह महाराष्ट्र कैडर में रहे। सेवानिवृत्ति के बाद वह हरदोई में सेवा के कार्य करते हैं। मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद एसआईटी की अंतिरम रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने ही रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद वह चर्चा में आ गए। वह दलित समुदाय से हैं। ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल की मृत्यु के बाद उनके स्थान पर उनको ट्रस्टी बनाया गया था। ट्रस्टी कृष्ण मोहन का अंतरिम महासचिव बनाकर ट्रस्ट ने एक तो दलित समाज के व्यक्ति को महत्व देने का काम किया। इसका दूरगामी परिणाम होगा। समाज में विभेद पैदा करने वालों को इस फैसले से जवाब मिलेगा। दूसरा वह एक आईएफएस अफसर हैं। प्रकरण शुरू होने के बाद से ही इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी कि मंदिर में व्यवस्था को लेकर किसी सेवानिवृति आईएएस को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
हालांकि अभी सीईओ की तैनाती को लेकर ट्रस्ट की बैठक में सोमवार को तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। वह नामों को चयन करके ट्रस्ट को सौंपेंगी। इसके बाद कार्य के लिए विशेष अधिकारी की तैनाती होगी लेकिन तब तक घोषित तौर पर कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव होंगे। एक सेवानिवृत आईएफएस अफसर होने के नाते वह अपने अनुभवों से एक सीईओ की तरह भी अघोषित तौर पर सलाह दे सकते हैं। श्रद्धालुओं की नाराजगी दूर करने के लिए ट्रस्ट ने उन सभी संवेदनशील मुद्दों पर बैठक में चर्चा के बाद उसे सार्वजनिक किया जिसको लेकर समाज में नाराजगी महसूस की जा रही है।
सितंबर 2025 में ट्रस्ट के सदस्य बने थे कृष्ण मोहन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को सितंबर 2025 को ट्रस्ट का सदस्य मनोनीत किया गया था। अनुसूचित समाज के कामेश्वर चौपाल के निधन से रिक्त हुए पद पर कृष्ण मोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का नया ट्रस्टी मनोनीत किया गया था। वह मूल रूप से कृष्ण मोहन हरदोई के रहने वाले हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 70 के दशक में एमएससी की पढ़ाई पूरी की थी। एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में पांच साल काम किया है। महाराष्ट्र कैडर में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ था। 2012 में वह सेवानिवृत हुए। इसके बाद से समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहे।
