National Road Safety Board : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए यूपी के एसीएस पद से रिटायर आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण

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Published By Ateeq Khan
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1990 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नितिन रमेश गोकर्ण को फिर बड़ी जिम्मेदारी

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024 में हर घंटे सड़क हादसों में कम से कम 20 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। वर्ष 2024 में देश में 4.87 लाख सड़क दुर्घटनाएं सामने आईं, इनमें 1.77 लाख लोगों की मौत हुई। तमिलनाडु के बाद यूपी में सबसे ज्यादा सड़क हादसों में मौतें हुई हैं। 

अमृत विचार : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति हो गई है। केंद्र सरकार ने यूपी के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नितिन रमेश गोकर्ण को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है। 1990 बैच के प्रशासनिक अधिकारी गोकर्ण यूपी के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) पद से सेवानिवृत्त हैं। आवास एवं शहरी नियोजन के अलावा वह परिवहन विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। करीब 37 वर्षों की प्रशासनिक सेवा का अनुभव रखने वाले गोकर्ण को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी मिली है। 

सड़क सुरक्षा बोर्ड सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने पर काम करता है। यातायात नियमों का सख्त बनाता है। सड़क सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की दिशा में काम करता है। ताकि देश में कम से कम सड़क दुर्घटनाएं हों। देश में सड़क हादसों में हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं। इन दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य के साथ बोर्ड कार्य कर रहा है। 

सड़क हादसे के डरावने आंकड़े 


सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024 में हर घंटे सड़क हादसों में कम से कम 20 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। वर्ष 2024 में देश में 4.87 लाख सड़क दुर्घटनाएं सामने आईं, इनमें 1.77 लाख लोगों की मौत हुई। तमिलनाडु के बाद यूपी में सबसे ज्यादा सड़क हादसों में मौतें हुई हैं। 

रोड एक्सीडेंट इन इंडिया नाम से जारी रिपोर्ट में बताती है कि देशभर में 4.88 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं के केस दर्ज किए गए हैं, जो विभिन्न राज्यों में हुए। देश के किसी न किसी हिस्से में हर घंटे में 56 एक्सीडेंट होते हैं। मतलब हर एक मिनट के आसपास देश में कहीं न कहीं कोई एक्सीडेंट हुआ। 

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने को लेकर देशभर में जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं। यातायात जागरूकता अभियान के अंतर्गत व्यापक स्तर पर मुहिम चलाई जाती है। इसके बावजूद एक्सीडेंट में लाखों लोगों की मौत सामने आ रही है। 

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