स्पेन में जून की गर्मी ने ली 900 से अधिक लोगों की जान, फ्रांस के अस्पतालों में मरीजों के लिए मँगाई जा रही बर्फ

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Published By Anjali Singh
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मैड्रिड/ओरसे, फ्रांस। यूरोप इस समय रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में है। स्पेन में जहां जून के महीने ने पिछले सात दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और गर्मी के कारण करीब 900 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं फ्रांस सहित पूरे यूरोप के अस्पतालों ने इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस स्थिति को भविष्य में आने वाली और भी भीषण गर्मियों के लिए महज "एक रिहर्सल" बताया है।

सात दशकों में दूसरा सबसे गर्म जून, मौतों का आंकड़ा 900 के पार

सरकारी मौसम विभाग एजेंसी (AEMET) के आंकड़ों के अनुसार, स्पेन में जब से मौसम का रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक इस वर्ष के जून माह को 'अत्यंत गर्म' की श्रेणी में रखा गया है। यह श्रेणी विशेष रूप से असामान्य और असाधारण प्राकृतिक घटनाओं के लिए ही आरक्षित होती है।

तापमान और मौतों के मुख्य आंकड़े

स्पेन के मुख्य हिस्से में इस बार औसत तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991-2020 की अवधि के औसत से 3.2 डिग्री सेल्सियस अधिक है। वर्ष 1961 से शुरू हुई एएमईटी की ऐतिहासिक शृंखला में केवल जून 2025 ही इससे अधिक गर्म रहा था, जब औसत तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

स्पेन में 1950 के बाद से 22 और 23 जून को जून महीने के दो सबसे गर्म दिन के रूप में दर्ज किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय की मौतों की निगरानी करने वाली प्रणाली (मोमो) के अनुमान के मुताबिक, इस अत्यधिक गर्मी के कारण जून में अब तक 892 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 600 से अधिक मौतें केवल एक भीषण गर्मी वाले हफ्ते में हुईं। जून के आखिरी दिनों के अंतिम आंकड़े आने के बाद यह संख्या 900 के पार जाने की आशंका है। वर्ष 2015 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह जून में गर्मी से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 1975 से 2000 के बीच जून में केवल दो बार भीषण लू चली थी, लेकिन 2000 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 10 हो गई। वैज्ञानिक इस बदलाव को मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के उपयोग से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग से जोड़कर देख रहे हैं।

मरीजों को बचाने के लिए अस्पतालों में बर्फ की भारी मांग 

फ्रांस में लू के मौजूदा बदतर हालात से सबक लेते हुए अस्पताल प्रबंधन मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए युद्धस्तर पर जुट गया है। भीषण गर्मी से प्रभावित मरीजों के शरीर का तापमान तेजी से कम करने के लिए उन्हें ठंडे पानी और बर्फ से नहलाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

'बर्फ' का संकट और रेस्तरां की मदद

अस्पतालों में अचानक बढ़ी बर्फ की मांग के कारण आपूर्ति का संकट खड़ा हो गया है। पेरिस-सैकले अस्पताल के पास अपनी बर्फ बनाने वाली मशीन न होने के कारण कर्मचारियों ने सुपरमार्केट से बर्फ खरीदी। संकट के समय एक स्थानीय रेस्तरां ने भी मदद का हाथ बढ़ाया और अस्पताल को अपनी बर्फ इस्तेमाल करने की पेशकश की। अब अस्पताल ने अपनी विशेष बर्फ बनाने वाली मशीन का ऑर्डर दे दिया है।

अस्पताल के एक निदेशक सेड्रिक लुसीज ने अपनी लाचारी और तैयारी को साझा करते हुए कहा, ''हमें लगा कि हम तैयार हैं। असल में हम तैयार नहीं थे। अस्पताल 24 घंटे काम कर रहा था क्योंकि हमें बहुत कम समय में नए समाधान खोजने थे। हमने मौजूदा हालात से सबक सीखा है।''

फ्रांस सरकार की बड़ी घोषणा

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घोषणा की है कि इस गर्मी में अस्पतालों में 'शीतलन प्रणाली' (Cooling Systems) लगाने और वेंटिलेशन व वार्डों को सुचारू रूप से चालू रखने के लिए 10 करोड़ यूरो (11.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर) खर्च किए जाएंगे।

डब्ल्यूएचओ (WHO) की चेतावनी: "यह तो बस एक रिहर्सल है"

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यूरोप के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए मंगलवार को कहा कि यह लू आने वाले समय में दिखने वाली और भी भयानक गर्मियों के लिए केवल "एक रिहर्सल" मात्र है। संगठन के मुताबिक, यूरोप में तापमान वैश्विक औसत से दोगुने से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। अब लू (Heatwave) कोई इक्का-दुक्का या असामान्य घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है जिससे निपटने के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को हर साल आने वाले 'फ्लू सीजन' की तरह स्थायी रूप से तैयार रहना होगा।

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