Ram Mandir Donation Case : सुरक्षा एजेंसी का दावा- हमने सिर्फ SBI को दिए थे कर्मचारी, चढ़ावा गबन से कोई संबंध नहीं
सुरक्षा एजेंसी ने गबन में भूमिका से किया इनकार, SBI पर जिम्मेदारी का दावा
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली सुरक्षा एजेंसी ने किसी भी भूमिका से इनकार किया है। एजेंसी का कहना है कि उसने केवल SBI अयोध्या शाखा को हाउसकीपिंग स्टाफ उपलब्ध कराया था।
वाराणसी : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की नकदी के कथित गबन मामले में नया मोड़ सामने आया है। नकदी प्रबंधन इकाई के लिए कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली निजी सुरक्षा एजेंसी सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज ने खुद को पूरे मामले से अलग बताते हुए कहा है कि उसने केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अयोध्या शाखा के अनुरोध पर कर्मचारियों की भर्ती की थी। कर्मचारियों की आगे की तैनाती और जिम्मेदारी तय करने में एजेंसी की कोई भूमिका नहीं थी।
एजेंसी के निदेशक गौरव सिंह ने बुधवार को बताया कि उनकी कंपनी ने कुल 22 कर्मचारियों की भर्ती कर उन्हें एसबीआई की अयोध्या शाखा में हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में भेजा था। उन्होंने कहा कि बैंक ने बाद में इन कर्मचारियों से कौन-कौन से कार्य कराए, इसकी जानकारी एजेंसी के पास नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इन सभी कर्मचारियों के नाम और बायोडाटा एसबीआई अयोध्या शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक की ओर से उपलब्ध कराए गए थे। ये सभी पहले किसी दूसरी एजेंसी के माध्यम से कार्यरत थे, जिन्हें बाद में उनकी कंपनी के जरिए नियुक्त किया गया।
गौरव सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी किसी भी मंदिर में ठेका लेकर काम नहीं करती। उनका कहना है कि एजेंसी को केवल एसबीआई शाखा के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया था। ऐसे में कर्मचारियों को बाद में नकदी गिनने या अन्य जिम्मेदारियां कैसे और किसके निर्देश पर दी गईं, इसका जवाब बैंक को देना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को एजेंसी की ओर से मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध करा दी गई हैं और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।
इस बीच, सूत्रों के अनुसार एसबीआई ने करीब तीन महीने पहले ही राम मंदिर में चढ़ावे की नकदी गिनने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को बदलने की इच्छा जताई थी। बैंक को कथित अनियमितताओं की आशंका थी, लेकिन आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने कर्मचारियों को बदलने की अनुमति नहीं दी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से नियुक्त छह कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, छह आरोपियों के कब्जे से करीब 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की गई है। मामले की जांच अभी जारी है।
अब तक जांच में क्या-क्या हुआ?
- 25 जून को एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद एफआईआर दर्ज।
- आठ आरोपी गिरफ्तार, जिनमें छह आउटसोर्स कर्मचारी शामिल।
- करीब 80 लाख रुपये नकद और विदेशी मुद्रा बरामद।
- सुरक्षा एजेंसी ने गबन में किसी भी भूमिका से किया इनकार।
- एसआईटी मामले की जांच में जुटी, कई पहलुओं की पड़ताल जारी।
