Gonda News : रील बनाते समय सरयू में डूबा छात्र, तलाश में जुटे गोताखोर, परिवार में मचा कोहराम

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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चार दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था निशांत, देर शाम तक नहीं मिला सुराग

करनैलगंज/गोंडा, अमृत विचार : बुधवार शाम करनैलगंज के कटरा घाट स्थित सरयू नदी में नहाने और रील बनाने के दौरान एक इंटरमीडिएट का छात्र पानी में डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस, राजस्व टीम और गोताखोर देर शाम तक किशोर की तलाश में जुटे रहे लेकिन उसका पता नहीं चल सका।

कोतवाली क्षेत्र की बालपुर चौकी अंतर्गत अंजनी तिवारी का 16 वर्षीय पुत्र निशांत तिवारी, जो अपने मामा के यहां झेलिया बालपुर में रहकर कक्षा 11 की पढ़ाई करता था, बुधवार को गांव के चार दोस्तों शुभम जायसवाल, अमर पाण्डेय, अभय दूबे और उत्तम के साथ बाइक से कटरा घाट सरयू नदी में नहाने और रील बनाने पहुंचा था। बताया जा रहा है कि नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और देखते ही देखते डूब गया। साथियों के शोर मचाने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी अभिषेक दावाच्या, प्रभारी निरीक्षक नरेन्द्र प्रताप राय, राजस्व निरीक्षक राम बहादुर पाण्डेय, लेखपाल विकास सिंह सहित पुलिस व राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। गोताखोरों की मदद से नदी में लगातार खोजबीन कराई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन भी घाट पर पहुंच गए हैं।

घर का इकलौता चिराग था निशांत, सदमे में परिवार 

कटरा घाट स्थित सरयू नदी में डूबे 16 वर्षीय निशांत तिवारी की घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। निशांत परिवार का इकलौता बेटा था। परिवार में अब केवल उसकी छोटी बहन खुशी बची है। घटना की सूचना मिलते ही मां निशा बेहाल हो गयी। पिता अंजनी तिवारी रोजी-रोटी के सिलसिले में अमृतसर में हैं। बेटे के डूबने की खबर मिलते ही वह भी बदहवास हो गए और घर लौटने की तैयारी में जुट गए हैं।

वहीं घटना की जानकारी मिलते ही निशांत के बड़े नाना उमेश्वर प्रसाद शुक्ल, जो परिवार की जिम्मेदारी संभालते हैं, सदमे से गिर पड़े। परिजनों के अनुसार उन्हें माइनर अटैक आया, जिसके बाद ग्रामीण तत्काल उन्हें इलाज के लिए गोंडा ले गए हैं। निशांत के नदी में डूबने की खबर से गांव झेलिया बालपुर और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है। घाट पर देर शाम तक परिजन ग्रामीण और रिश्तेदार टकटकी लगाए गोताखोरों की तलाश अभियान देखते रहे। हर किसी की जुबान पर बस यही दुआ थी कि किसी तरह निशांत मिल जाए।

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