Kanpur News : कानपुर-कबरई हाईवे को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, 7,145 करोड़ की परियोजना से सफर होगा आसान
केंद्रीय कैबिनेट ने 7,145.14 करोड़ रुपये की कानपुर-कबरई 4/6 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना को मंजूरी दी। परियोजना से यात्रा समय 3.5 घंटे से घटकर 1.5 घंटे होगा और करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस रोजगार सृजित होंगे।
नई दिल्ली/कानपुर। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (एनएच-34) के कानपुर-कबरई खंड पर 7,145.14 करोड़ रुपये की लागत से 4/6 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के निर्माण को हरी झंडी दी है। इस परियोजना का निर्माण बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के तहत विकसित किए जा रहे भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद कानपुर और कबरई के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध यातायात संभव होगा। साथ ही सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से संपर्क भी बेहतर होगा।
नई सड़क उत्तर प्रदेश के औद्योगिक एवं व्यावसायिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों से जोड़ेगी। परियोजना के तहत तैयार होने वाला हाईवे 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुरूप होगा, जिससे कानपुर से कबरई की यात्रा का समय 3.5 घंटे से घटकर करीब 1.5 घंटे रह जाएगा। इससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, वाहनों की परिचालन लागत कम होगी और माल ढुलाई अधिक तेज एवं किफायती बनेगी।
यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और कई राज्य राजमार्गों से जुड़ेगी, जिससे पूरे क्षेत्र के सड़क नेटवर्क का बेहतर एकीकरण होगा। साथ ही कबरई के खनन क्षेत्र से संपर्क मजबूत होने के कारण खनिज, निर्माण सामग्री, औद्योगिक उत्पाद और कृषि उपज के परिवहन को भी गति मिलेगी।
सरकार ने बताया कि यह परियोजना पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की जा रही है। इसके जरिए 16 आर्थिक केंद्र, नौ सामाजिक केंद्र और 10 प्रमुख लॉजिस्टिक हब बेहतर सड़क संपर्क से जुड़ेंगे। इनमें कानपुर, उन्नाव, रनिया, पंखी, चकेरी, महोबा और कबरई जैसे औद्योगिक एवं परिवहन केंद्र शामिल हैं।
रोजगार के मोर्चे पर भी यह परियोजना अहम साबित होगी। अनुमान है कि निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कुल मिलाकर परियोजना से करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है। वहीं वित्त वर्ष 2027-28 तक इस मार्ग पर औसत दैनिक यातायात 18,069 यात्री कार इकाई (पीसीयू) तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
परियोजना की 5 बड़ी बातें
- 7,145.14 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा हाईवे।
- कानपुर-कबरई यात्रा समय 3.5 घंटे से घटकर 1.5 घंटे होगा।
- भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर का अहम हिस्सा।
- 16 आर्थिक केंद्र, 9 सामाजिक केंद्र और 10 लॉजिस्टिक हब होंगे कनेक्ट।
- करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान।
कानपुर को क्या होंगे बड़े फायदे?
- सफर होगा तेज: कानपुर से कबरई की यात्रा 3.5 घंटे से घटकर करीब 1.5 घंटे रह जाएगी।
- औद्योगिक विकास को बढ़ावा: कानपुर के औद्योगिक क्षेत्रों का मध्य प्रदेश के खनिज और विनिर्माण क्षेत्रों से बेहतर संपर्क होगा।
- माल ढुलाई होगी आसान: परिवहन लागत और समय कम होने से व्यापार और लॉजिस्टिक्स को फायदा मिलेगा।
- बेहतर कनेक्टिविटी: कानपुर रिंग रोड, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, एनएच-34 और एनएच-35 से सीधा जुड़ाव मजबूत होगा।
- रोजगार के अवसर: परियोजना के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
- निवेश की संभावना: बेहतर सड़क नेटवर्क से कानपुर में औद्योगिक निवेश और व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
