PM मोदी कर सकते हैं शिलान्यास : कानपुर-कबरई फोरलेन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण इसी साल होगा शुरू

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे: 117.7 किमी फोरलेन सड़क का काम जल्द शुरू, 93 गांवों की भूमि होगी अधिग्रहीत

एनएचएआई कानपुर से कबरई तक 117.7 किमी लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे का निर्माण शुरू करने की तैयारी में है। परियोजना के लिए चार जिलों के 93 गांवों की 1139 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित होगी।

कानपुर, अमृत विचार। मोदी सरकार की मंजूरी मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मौजूदा एनएच-34 के समानांतर कानपुर से कबरई तक 117.7 किमी लंबे फोरलेन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। सब कुछ तय समय में हुआ तो तीन साल में इस हाईवे का काम पूरा हो जाएगा।

फिलहाल, दो माह के भीतर धारा 3-डी का प्रकाशन करके अगले छह माह में टेंडर और जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करके निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी माह प्रस्तावित कानपुर दौरे में इस हाईवे का शिलान्यास भी कर सकते हैं।

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे के बनने से रोज एक लाख से ज्यादा लोगों को जाम से निजात मिलने के साथ आएदिन होने वाले खूनी हादसों पर लगाम लगेगी। अभी नौबस्ता के आगे से कबरई तक मौजूदा एनएच-34 मार्ग दो लेन का है। इसके चलते रोज वाहन सवारों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। दो लेन के वर्तमान मार्ग से प्रतिदिन करीब 30 हजार वाहनों का आवागमन होता है। इसमें आधी से ज्यादा संख्या गिट्टी और मौरंग से लदे भारी वाहनों की होती है।

एनएच-34 के दाहिनी तरफ बनेगा नया फोरलेन हाईवे

नया ग्रीनफील्ड हाईवे कानपुर- कबरई के बीच मौजूदा एनएच-34 के दाहिनी तरफ बनेगा। रमईपुर के पास मगरासा से शुरू होकर यह मार्ग कबरई के बधवा गांव तक जाएगा, जहां पर इसे बांदा-सागर हाईवे से कनेक्ट कर दिया जाएगा। हालांकि अभी यह हाईवे फोरलेन ही बनेगा, लेकिन इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है, जिससे भविष्य में चौड़ा करते हुए छह-लेन का बनाया जा सकेगा।

चार जिलों के 93 गांवों की होगी 1139 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत

इस ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए 4 जिलों के 93 गांवों से कुल 1139 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। परियोजना की डीपीआर के मुताबिक कानपुर नगर और देहात के 49, हमीरपुर के 35 और महोबा के 9 गांवों के किसानों की भूमि का अधिग्रहण होना है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार जल्द ही जमीन का मूल्यांकन करने के साथ ही जिला प्रशासन को मुआवजा वितरण के लिए बजट उपलब्ध करा दिया जाएगा।

क्या होता बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मोड, जिसके तहत होगा निर्माण

कानपुर-कबरई हाईवे को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मोड के तहत बनाया जाएगा, जो कि सार्वजनिक और निजी भागीदारी का पीपीपी मॉडल है। इसमें सरकार निजी कंपनी को सड़क, पुल या एयरपोर्ट जैसी बड़ी परियोजना बनाकर उसके संचालन का अधिकार देती है। निजी कंपनी को निर्धारित समयावधि तक जनता से टोल वसूलने का अधिकार होता है, अपना लाभ निकालने के बाद कंपनी सरकार को प्रोजेक्ट वापस सौंप देती है।

क्या है धारा 3 डी, जिसका, प्रकाशन अब जल्द होगा

राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के अंतर्गत धारा 3 डी भूमि अधिग्रहण से संबंधित है। धारा 3-डी के तहत सक्षम प्राधिकारी या सरकार आपत्तियों का निपटारा करने के बाद भूमि अधिग्रहण की अंतिम घोषणा राजपत्र (गजट) में प्रकाशित करता है। इस अधिसूचना के जारी होते ही संबंधित भूमि सभी तरह के बंधनों से मुक्त होकर सीधे केंद्र सरकार के अधीन हो जाती है। इससे पहले धारा 3-ए के तहत नोटिस और आपत्तियां मांगने के बाद सरकार तय करती है कि किस जमीन का अधिग्रहण करना है। धारा 3-डी के तहत अधिसूचना जारी हो जाने पर जमीन का मालिकाना हक सरकार या प्राधिकरण के पास सुरक्षित हो जाता है।

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