राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, कहा- 'आसमान नहीं टूट पड़ेगा'
ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद होगी मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद होगी। याचिका में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर चुकी है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिका पर त्वरित सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने कहा कि इस मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "आसमान नहीं टूट पड़ेगा... इतनी क्या जल्दी है।"
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व वाले एक बहु-विषयक विशेष जांच दल (एसआईटी) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं व अन्य कथित अवैधताओं की जांच करनी चाहिए।
इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका में केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को सार्वजनिक हित की रक्षा करने तथा करोड़ों भक्तों व दानदाताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र का गठन व संचालन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया, ''श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े धन के कथित गबन और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन खबरों ने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, जिन्होंने अयोध्या की गौरवपूर्ण विरासत की पुनर्स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया है।''
इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बिना किसी प्राथमिकी या नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए इस मामले की जांच शुरू कर दी है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर ट्रस्ट से कथित रूप से धन गायब होने और अन्य कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित रिपोर्टों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए।
याचिका के अनुसार, यह जांच ऐसी एकीकृत जांच एजेंसी द्वारा कराई जानी चाहिए, जिसके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध हो। इसमें कहा गया है, ''ऐसी जांच से आम लोगों का भरोसा अधिक मजबूत होगा, बजाय इसके कि केवल प्रशासनिक अधिकारियों वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) प्रारंभिक जांच करे, जिनके पास आपराधिक मामलों की जांच की विशेषज्ञता शायद नहीं हो।''
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस विशेष जांच दल (एसआईटी) में लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल है।
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