वेनेजुएला में भीषण भूकंप का भारत पर क्या होगा असर? कच्चे तेल की सप्लाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ी चिंता
नई दिल्लीः वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने केवल स्थानीय स्तर पर भारी तबाही ही नहीं मचाई, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी नई चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंदरगाहों पर संभावित असर, शिपिंग में देरी और बीमा लागत बढ़ने से भारत के लिए कच्चे तेल का आयात प्रभावित हो सकता है और इसकी लागत भी बढ़ सकती है।
24 जून को वेनेजुएला में कुछ सेकंड के अंतराल पर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप दर्ज किए गए। इन्हें पिछले 125 वर्षों के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक बताया जा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, हजारों लोग घायल हुए हैं और क्षेत्र में लगातार आफ्टरशॉक महसूस किए जा रहे हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब भारत ईरान से जुड़े तनाव के कारण प्रभावित हुई तेल आपूर्ति से उबरने की कोशिश कर रहा था। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। हालांकि अब वेनेजुएला में आई आपदा ने भारत के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
भारतीय रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण बना वेनेजुएला
ईडीएमई इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज कुणाल खन्ना के अनुसार, हाल के महीनों में वेनेजुएला भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है। उनका कहना है कि यदि वहां के निर्यात ढांचे पर असर पड़ता है तो इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई दे सकता है।
अप्रैल और मई में बढ़ी थी तेल खरीद
मध्य पूर्व में बनी अनिश्चित परिस्थितियों के बीच भारत ने अप्रैल और मई के दौरान वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की थी। भारतीय रिफाइनरियों ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में वेनेजुएला को प्राथमिकता दी थी, जिससे वह भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया।
सिर्फ तेल उत्पादन नहीं, पूरी सप्लाई चेन पर असर की आशंका
विशेषज्ञों के मुताबिक, जोखिम केवल तेल उत्पादन केंद्रों तक सीमित नहीं है। यदि बिजली आपूर्ति बाधित होती है, सड़क और परिवहन नेटवर्क क्षतिग्रस्त होते हैं या बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंध लागू होते हैं, तो जहाजों की आवाजाही कई दिनों या सप्ताह तक प्रभावित हो सकती है।
वेनेजुएला के प्रमुख कार्गो बंदरगाह ला गुआइरा को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है, जिससे शिपिंग और पोर्ट संचालन को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि जहाजों को माल लोड करने के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। रूट बदलने और देरी के कारण डेमरेज शुल्क में भी बढ़ोतरी संभव है। इसका सीधा असर रिफाइनरियों, व्यापारियों और बीमा कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
कुणाल खन्ना का कहना है कि अब तक वेनेजुएला से आने वाले जहाजों के लिए बीमा पॉलिसियों में मुख्य रूप से भू-राजनीतिक और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखा जाता था, लेकिन अब प्राकृतिक आपदाओं को भी प्रमुख जोखिम के रूप में शामिल करना होगा।
भारत के निवेश पर भी पड़ सकता है असर
भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश ने वेनेजुएला की तेल परियोजनाओं में निवेश किया हुआ है। यदि उत्पादन या निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसका असर भारत के आर्थिक और परिचालन हितों पर भी पड़ सकता है।
हाल ही में हुई थी उच्चस्तरीय बातचीत
इसी महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं ने खनन, महत्वपूर्ण खनिज, दवा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भारतीय निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की थी। हालांकि, भूकंप के बाद इन योजनाओं की गति प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
नई सप्लाई चेन के साथ बढ़े नए जोखिम
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी नए देश को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत बनाने से जोखिम समाप्त नहीं होता, बल्कि उसका स्वरूप बदल जाता है। मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने वेनेजुएला का रुख किया था, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने नए व्यापारिक मार्गों से जुड़े जोखिमों को भी उजागर कर दिया है।
आगे की स्थिति पर रहेगी नजर
अब नुकसान का पूरा आकलन सामने आने के बाद शिपिंग कंपनियां, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कारोबारी और बीमा कंपनियां हालात पर करीबी नजर रखेंगी। भारत के लिए यह घटनाक्रम उसके नए और महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग से जुड़े जोखिमों का संकेत माना जा रहा है।
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