यूपी में बिगड़ रहा मौसम का गणित : 37 जिलों में 99% तक कम हुई बारिश, सीएम योगी ने बुलाई आपात बैठक

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Published By Anjali Singh
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-जून में यूपी के 37 जिलों में 60 से 99 प्रतिशत तक कम हुई बारिश, कौशांबी में नहीं गिरी एक भी बूंद -सीएम की बैठक के बाद सभी विभाग तैयारी में जुटे, खरीफ और पेयजल संकट से निपटने की रणनीति -किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई और फसली ऋण समय पर उपलब्ध कराने में कोताही पर सीएम सख्त

लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश में मानसून की सुस्त चाल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। जून माह में प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश होने के बाद सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद सभी विभागों को अलर्ट मोड में रहने और हर परिस्थिति से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी में जुट गए हैं।

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के अनुसार एक जून से 24 जून तक प्रदेश के 75 में से 54 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें 37 जिलों में वर्षा की कमी 60 से 99 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सबसे चिंताजनक स्थिति कौशांबी की है, जहां जून माह में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई और 100 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो के प्रभाव के कारण इस बार मानसून की रफ्तार धीमी है। सामान्य तौर पर 18 से 20 जून के बीच सक्रिय होने वाला मानसून 24 जून तक प्रदेश में प्रभावी नहीं हो सका। इसका सीधा असर धान, मक्का, अरहर और सब्जियों की खेती पर पड़ने की आशंका है। पूर्वांचल और अवध के जिलों में हालात सबसे अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई जल, बिजली और फसली ऋण उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकताएं तय करते हुए खरीफ अभियान को मिशन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। सभी जिलाधिकारियों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखने को कहा है। संभावित सूखे की आशंका को देखते हुए सरकार ने आकस्मिक योजना भी तैयार की है। आवश्यकता पड़ने पर उर्द, मूंग, ज्वार, बाजरा और तिल जैसी कम अवधि वाली फसलों के आच्छादन को बढ़ाया जाएगा। किसानों को मोबाइल संदेश, आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से कृषि सलाह दी जा रही है। सिंचाई विभाग को नहरों के प्रभावी संचालन, पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए विशेष योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

अंबेडकरनगर, अयोध्या, बाराबंकी, बस्ती, जौनपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, प्रयागराज, वाराणसी, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, झांसी, महोबा, पीलीभीत और शामली समेत 37 जिलों में 60 से 99 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि आगरा, एटा, हाथरस और संभल में सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि मथुरा, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, बुलंदशहर और कन्नौज में भी सामान्य से अधिक वर्षा हुई है।

सरकार की तैयारी

• 1.77 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध
• 1.12 लाख क्विंटल से अधिक बीज वितरित
• 136 लाख क्विंटल से अधिक भूसा संग्रहित
• फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड पर विशेष जोर
• पेयजल, सिंचाई और पशुधन संरक्षण के लिए जिला स्तर पर निगरानी

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