Rampur News : भारत-ताजिकित्सान के बीच सांस्कृतिक-शैक्षणिक आदान-प्रदान पर चर्चा

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
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रामपुर पहुंचे ताजिकिस्तान के राजदूत, गांधी समाधि पर किए पुष्प अर्पित, देखी रजा लाइब्रेरी 61- गांधी समाधि पर पुष्प अर्पित करते ताजिकिस्तान के राजदूत व लाइब्रेरी के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र।

रामपुर, अमृत विचार। बुधवार को ताजिकिस्तान गणराज्य के राजदूत लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा रामपुर पहुंचे। उन्होंने गांधी समाधि पर पुष्प अर्पित किए। वहीं रजा लाइब्रेरी के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र के मध्य सांस्कृतिक-शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा भारत-ताजिकिस्तान संबंधों को सुदृढ बनाने को लेकर चर्चा हुई।

राजदूत ने दीवान-ए-बेदिल, जखीरा-ए-ख्वारज्मशाही, रागमाला एलबम का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने पुस्तकालय के भव्य दरबार हॉल, पांडुलिपि अनुभाग तथा संरक्षण प्रयोगशाला को देखा। राजदूत ने कहा कि भारत के अनेक प्रसिद्ध कवियों एवं विद्वानों ने फारसी तथा ताजिक साहित्य और काव्य परंपरा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसकी झलक यहां सुरक्षित दुर्लभ ग्रंथों एवं पांडुलिपियों में देखने को मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पुस्तकालय में संरक्षित ये अमूल्य ग्रंथ एवं पांडुलिपियां भविष्य में व्यापक स्तर पर शोध, अध्ययन एवं प्रकाशन के माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा विद्वानों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि ताजिकिस्तान और रजा लाइब्रेरी के मध्य सहयोग को आगे बढ़ाने तथा दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ संपर्क स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। लाइब्रेरी के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंध सलाहकार समिति के सदस्य प्रो. रमाकांत द्विवेदी भी उपस्थित रहे। चर्चा के दौरान दोनों देशों के संस्थानों के मध्य सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने तथा भविष्य में समझौता ज्ञापन संपादित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने आगे बताया कि लाइब्रेरी के संग्रह में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां एवं ग्रंथ सुरक्षित हैं जिनका प्रत्यक्ष संबंध ताजिकिस्तान की ऐतिहासिक, भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपराओं से है। इस संदर्भ में राजदूत ने आश्वासन दिया है कि ताजिकिस्तान से विद्वानों एवं शोधार्थियों को रजा लाइब्रेरी भेजा जाएगा, ताकि वे इन दुर्लभ ग्रंथों, लिपियों एवं भाषाई परंपराओं का गहन अध्ययन कर सकें।

किताबों का ताजमहल कही जाती है लाइब्रेरी
निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने ताजिकिस्तान के राजदूत लाइब्रेरी के गौरवशाली इतिहास, यहां संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों, संरक्षण प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली तथा डिजिटलीकरण एवं शोध से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी। कहा कि लाइब्रेरी अपनी अद्वितीय स्थापत्य गरिमा एवं दुर्लभ संग्रह के कारण इसे किताबों का ताजमहल भी कहा जाता है तथा विश्व की सुंदरतम लाइब्रेरी में इसकी विशेष पहचान है। बताया कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के देशों की इस संग्रह के प्रति गहरी रुचि रही है।

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