आधुनिक मराठी रंगमंच की प्रणेता विजया मेहता का निधन, पीएम मोदी, अनुपम खेर और शबाना आजमी ने दी श्रद्धांजलि

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Published By Anjali Singh
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नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय प्रदर्शन कला और थियेटर जगत की सबसे सम्मानित हस्तियों में से एक, प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक एवं अभिनेत्री विजया मेहता का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मंगलवार रात दक्षिण मुंबई स्थित उनके घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके परिवार में एक बेटी और दो बेटे हैं। प्यार से लोग उन्हें 'बाई' कहकर बुलाते थे। विजया मेहता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर बॉलीवुड और रंगमंच की दिग्गज हस्तियों ने गहरा दुख प्रकट किया है और भारतीय सिनेमा व थियेटर में उनके योगदान को याद किया है।

आधुनिक मराठी रंगमंच में क्रांतिकारी काम ने छोड़ी अमिट छाप: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए श्रीमती विजया मेहता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।

उन्होंने लिखा, "श्रीमती विजया मेहता जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। उन्हें संस्कृति और सिनेमा की महानतम हस्तियों में से एक के रूप में याद किया जाएगा। आधुनिक मराठी रंगमंच की प्रणेता, वह अपनी रचनात्मकता और कलात्मक उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती थीं। उनके काम ने अभिनेताओं, निर्देशकों और रंगमंच प्रेमियों की पीढ़ियों को प्रेरित किया।"

पीएम मोदी ने रंगमंच और सिनेमा में उनके असाधारण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अभिनव दृष्टिकोण और समर्पण ने अनिक्षत कला प्रेमियों को प्रभावित किया है। उन्होंने दुख की इस घड़ी में उनके परिवार, प्रशंसकों और पूरे कला जगत के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।


"वह कला के स्वरूप को ही बदल देती थीं"  शबाना आजमी

अभिनेत्री शबाना आजमी ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए विजया मेहता को एक दूरदर्शी कलाकार बताया। उन्होंने लिखा कि जब आप ऐसे कलाकारों की बात करते हैं जो केवल अभिनय नहीं करते बल्कि कला के स्वरूप को ही बदल देते हैं, तो सबसे पहला नाम विजया मेहता का आता है। उन्होंने अपनी जिज्ञासा और निर्भीक रचनात्मकता से भारतीय रंगमंच को एक नया रूप दिया। शबाना आजमी के अनुसार, विजया जी का काम केवल रंगमंच तक सीमित नहीं था, बल्कि वह सत्य, मानवता और कहानी कहने की असीम शक्ति के बारे में था।

 

"उनके साथ हर रिहर्सल सिखाती थी कि कला का सागर कितना अथाह है"  अनुपम खेर

विजया मेहता द्वारा निर्देशित चर्चित फिल्मों 'राव साहेब' (1986) और 'पेस्टनजी' (1988) में काम कर चुके अभिनेता अनुपम खेर ने उन्हें भारत की अब तक की सबसे बेहतरीन रंगमंच प्रतिभाओं में से एक बताया। 

इंस्टाग्राम पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा, "मुझे 'राव साहेब' और 'पेस्टनजी' में विजया बाई के साथ काम करने का सौभाग्य मिला। मैं तब तक कुछ फिल्में कर चुका था और सोचता था कि अभिनय को समझता हूं। लेकिन उनके साथ हर रिहर्सल मुझे याद दिलाती था कि इस कला का सागर कितना अथाह है।" खेर ने आगे कहा कि मानव व्यवहार की इतनी गहरी समझ होने के बावजूद वह कभी अपना ज्ञान दूसरों पर थोपती नहीं थीं। उनका अनुशासन शालीनता में, आत्मीयता विनम्रता में और प्रतिभा सादगी में लिपटी हुई थी।

 

भारतीय रंगमंच को आकार देने में ऐतिहासिक योगदान

विजया मेहता को लीक से हटकर की गई प्रस्तुतियों और अभिनय के माध्यम से मराठी रंगमंच का कायाकल्प करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने नाटककार विजय तेंदुलकर, अभिनेता डॉ. श्रीराम लागू और रंगकर्मी अरविंद देशपांडे के साथ मिलकर प्रभावशाली थिएटर समूह ''रंगायन'' की स्थापना की थी।

उन्होंने भारतीय रंगमंच को कई कालजयी नाटक और फिल्में दीं, जिनमें मुख्य हैं, 'एक शून्य बाजीराव', 'बैरिस्टर', 'हमीदाबाईची कोठी', 'पुरुष', 'महासागर' और 'शाकुंतल'। 'राव साहेब' और 'पेस्टनजी'। उनका योगदान केवल मंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने उभरती हुई प्रतिभाओं को निखारा और समकालीन भारतीय रंगमंच के विकास को एक नई दिशा दी। उनके जाने से भारतीय कला और सांस्कृतिक जगत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना असंभव है।

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