Ram Mandir News : राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव तय? चढ़ावा विवाद के बाद 11 जुलाई को नए सीईओ और महासचिव पर लग सकती है मुहर

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Published By Deepak Mishra
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अयोध्या/लखनऊ, अमृत। महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रस्ट की अहम बैठक 11 जुलाई को अयोध्या में बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के नए सीईओ और महासचिव के नाम पर फैसला लिया जा सकता है। चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट में हुए घटनाक्रम के चलते यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव, मंदिर की व्यवस्थाओं की समीक्षा और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी। सबसे अधिक नजर महासचिव पद पर होने वाले फैसले पर रहेगी। माना जा रहा है कि ट्रस्ट नए महासचिव के चयन के साथ संगठनात्मक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा सकता है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर जानें क्या बोला ट्रस्ट...

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आधिकारिक बयान जारी किया।

ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चढ़ावा चोरी प्रकरण से सभी सदस्य बेहद आहत और दुखी हैं। ट्रस्ट ने कहा कि यह घटना अत्यंत पीड़ादायक है, लेकिन उसे न्यायिक प्रक्रिया और सत्य की जीत पर पूरा विश्वास है। प्रेस विज्ञप्ति में ट्रस्ट ने कहा, "हम आहत हैं, अत्यंत दुखी हैं। हमें विश्वास है कि ये बादल जल्द छटेंगे, अंधेरा हटेगा और सत्य-सूर्य का प्रकाश अवश्य होगा।"

ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को ट्रस्ट का बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकक सिद्धार्थ नाथ ने अखिलेश पर लगाया यह बड़ा आरोप 

प्रयागराज। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर की गई टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं योगी सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री तथा विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर ही राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। उन्होंने कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आई, उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। 

मामले की विवेचना अभी जारी है। उन्होंने कहा कि स्वयं अखिलेश यादव ने भी इस मामले में एसआईटी जांच की मांग की थी। ऐसे में अब सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाना विरोधाभासी है। उनका कहना था कि जांच निष्पक्ष ढंग से चल रही है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। सपा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या और मथुरा नहीं जाते, लेकिन सरकार को बदनाम करने के लिए लगातार आरोप लगाते रहते हैं।

उन्होंने अखिलेश यादव के लिए "यदुमुल्ला" शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि "राम भक्त जब जांच करते हैं तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है।" उल्लेखनीय है कि अखिलेश यादव ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था, "वे क्या करेंगे दूध का दूध और पानी का पानी, लालच ने मार दिया है जिनकी आंख का पानी।" 

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा लगाए गए चंदा चोरी के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केजरीवाल को "बरसाती मेंढक" बताते हुए कहा कि वह राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से ऐसे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में जमानत पर बाहर होने के कारण जनता उनकी बातों पर विश्वास नहीं करती। 

भाजपा विधायक ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने तक सभी को इंतजार करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार कार्य कर रही है और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, इसलिए किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। 

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