Lucknow Fire Tragedy : लखनऊ में हर तरफ मातम, लोगों की आंखें नम, बेबसी के बीच गूंजती रहीं मदद की पुकारें

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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घटनास्थल पर दिल दहला देने वाले नजारे दिखे। कई महिलाएं अपने बच्चों से मदद की गुहार वाली फोन कॉल मिलने के बाद मौके पर पहुंचीं और पुलिसकर्मियों समेत हर किसी से अपने बच्चे की जान बचाने की मिन्नतें करती दिखीं।

लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को एक व्यावसायिक इमारत में हुए भीषण अग्निकांड के दौरान फंसे लोगों के रोते-बिलखते परिजन के क्रंदन और बेबसी देखकर हर कोई मर्माहत हो उठा। मौके पर चीखते-पुकारते लोगों को बचा ना पाने और उन्हें मरता देखने की लोगों की बेबसी देखकर हर कोई गमगीन हो गया। 

घटनास्थल पर दिखे दिल दहला देने वाले नजारे

घटनास्थल पर दिल दहला देने वाले नजारे दिखे। कई महिलाएं अपने बच्चों से मदद की गुहार वाली फोन कॉल मिलने के बाद मौके पर पहुंचीं और पुलिसकर्मियों समेत हर किसी से अपने बच्चे की जान बचाने की मिन्नतें करती दिखीं। रोती-बिलखती एक महिला पुलिसकर्मियों से आग से घिरी इमारत के अंदर जाने देने की गुहार लगाते हुए कह रही थी, ''मुझे अपने बेटे के पास जाने दो।'' 

कुछ छात्रों ने तो केबल के सहारे कूदकर बचाई जान

एक स्थानीय निवासी ने संवाददाताओं को बताया कि कुछ छात्रों ने तो केबल के सहारे कूदकर जान बचा ली लेकिन कई छात्र बाहर नहीं निकल सके और उनकी झुलसने से मौत हो गयी। उसने बताया, ''घटनास्थल पर पहुंचे एक अंकल ने बताया कि उनके बेटे ने उन्हें फोन करके बताया था कि कोचिंग सेंटर में आग लग गयी है, मुझे बचा लीजिये। इस पर अंकल यहां आये मगर वह चाहकर भी अपने बेटे को बचा नहीं सकते थे। वह पूरी तरह बेबस थे और रो रहे थे।''

यह बेबसी सिर्फ एक शख्स की नहीं थी, बल्कि भड़कती आग में अपनों के फंसे होने की सूचना पाकर मौके पर पहुंचा हर व्यक्ति इसी लाचारी का सामना कर रहा था। एक छात्र ने बताया कि इमारत की छत का रास्ता बंद था जिससे आग में फंसे लोग बाहर नहीं निकल सके। घटनास्थल पर मौजूद धीरज मेहरा ने बताया कि उन्हें अपने साथी आदित्य श्रीवास्तव का फोन आया था। आदित्य इमारत के गेमिंग जोन में थ्रीडी आर्टिस्ट के तौर पर काम करते थे और तीसरी मंजिल पर फंस गए थे।

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लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को ऊषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिल एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग में एक एनिमेशन सेंटर में पढ़ रहे कई छात्रों समेत कुल 15 लोगों की मौत हो गयी तथा सात अन्य जख्मी हो गये। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग फैलते ही कई स्थानीय निवासी मौके पर पहुंचे और पुलिस व अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। कुछ लोगों ने इमारत के शीशे तोड़ने की कोशिश की ताकि धुआं बाहर निकल सके और अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलने का रास्ता बन सके। 

इमारत के भीतर छात्रों को फंसा देख लोगों ने की मदद की कोशिश

कुछ चश्मदीदों ने बताया कि इमारत के भीतर छात्रों को फंसा हुआ देखकर कई लोगों ने मदद की कोशिश की। मौके की कुछ तस्वीरों में एक छात्र को आग की लपटों के बीच इमारत की एक मंजिल से गिरते हुए देखा गया। वह बाहर रखे गद्दे जैसी चीज पर गिरा, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे इलाज मुहैया कराया।

आगरा में तैनात और फिलहाल लखनऊ मुख्यालय से जुड़े लांस नायक छवि राम भी घटनास्थल के पास से गुजर रहे थे और जानकारी मिलते ही वह भी बचाव कार्य में शामिल हो गए। छवि राम ने एक न्यूज एजेंसी  से कहा कि उनके पेशेवर अनुभव को देखते हुए अधिकारियों ने उन्हें बचाव कार्य में शामिल किया। आग बुझाने में जुटे दमकलकर्मियों की मदद के लिये आस-पास की इमारतों में रहने वाले लोग भी आगे आये और उन्हें पानी की बोतलें देते हुए देखा गया। दमकलकर्मी बगल की इमारत में पहुंचे और आग से घिरी इमारत में दाखिल होने के लिये दो रास्ते बनाये।

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