Lucknow Fire Tragedy : ट्रॉमा सेंटर में चीखें, आंसू और टूटते सपने... अपनों की तलाश में भटकते परिजनों की सिसकियों से गूंज उठा परिसर
आग के बाद दर्द का सबसे बड़ा मंजर, इलाज की जद्दोजहद के बीच पहुंचते रहे घायल और शव
लखनऊ, अमृत विचार : शाम करीब साढ़े तीन बजे के बाद एक के बाद एक ट्रॉमा सेंटर की ओर दौड़ती एंबुलेंसों ने बड़े हादसे का संकेत दे दिया था। किसी एंबुलेंस में जिंदगी बचाने की उम्मीद थी तो किसी में अपनों की आखिरी पहचान। अलीगंज स्थित एनीमेशन सेंटर में लगी आग के बाद जब घायलों और छात्रों को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लाया जाने लगा तो वहां का माहौल पल-पल बदलता चला गया।
पहले से मरीजों के दबाव से जूझ रहे ट्रॉमा सेंटर में अचानक बड़ी संख्या में घायलों और शवों के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार, डीन डॉ. केके सिंह समेत वरिष्ठ चिकित्सक तत्काल मोर्चे पर उतर आए।
इमरजेंसी सेवाओं को सुचारु रखने के लिए विभिन्न विभागों के डॉक्टर, रेजिडेंट और कर्मचारी भी राहत कार्यों में जुट गए। कोई घायल छात्रों को स्ट्रेचर पर लेकर उपचार कक्ष तक पहुंचा रहा था, तो कोई दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था में लगा था। लेकिन जब कुछ घायल मृत अवस्था में ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, तो इलाज की भागदौड़ के बीच अचानक सन्नाटा और मातम पसर गया।
एनीमेशन की दुनिया में नए सपने संजोकर निकले युवाओं की दर्दनाक मौत ने डॉक्टरों और कर्मचारियों को भी भीतर तक झकझोर दिया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में परिजन भी ट्रॉमा सेंटर पहुंचने लगे। किसी की आंखें अपने बेटे या बेटी को तलाश रही थीं, तो किसी की चीखें पूरे परिसर में गूंज रही थीं।
अपनों को खोने का दर्द चेहरों पर साफ झलक रहा था। रोते-बिलखते परिवारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। ट्रॉमा सेंटर की वह शाम केवल इलाज और राहत कार्यों की नहीं थी, बल्कि कई परिवारों के सपनों, उम्मीदों और भविष्य के बिखर जाने की दर्दनाक गवाही भी दे रही थी।
