बहराइच मस्जिद विवाद: नहीं हटेगी 200 साल पुरानी मस्जिद, डीएम ने नोटिस जारी करने के दिए निर्देश
बहराइच। बहराइच-नेपाल राजमार्ग पर स्थित एक मस्जिद को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने मंगलवार को रोक लगा दी और संबंधित पक्षों को नोटिस देने समेत सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही विस्तृत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अधिकारियों ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बहराइच के परियोजना निदेशक प्रशांत कुमार बाजपेई ने 15 जून को नगर मजिस्ट्रेट को पत्र भेजकर राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के अंतर्गत ग्राम काजीजोत में कथित अतिक्रमण हटाने के लिए 16 जून पूर्वाह्न 11 बजे का समय निर्धारित किए जाने की सूचना दी थी तथा पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मस्जिद और आसपास के क्षेत्र में अफवाहें फैल गईं।
हालांकि प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप करके लोगों को आश्वस्त किया कि फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। एनएचएआई के एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि जिस स्थान को अतिक्रमण की श्रेणी में माना जा रहा है, वहां एक मस्जिद स्थित है और संवेदनशीलता के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए आज की तारीख निर्धारित करके प्रशासन को पत्र लिखा गया था, लेकिन प्रशासन की ओर से आज यह कहा गया कि राजस्व कर्मियों से सत्यापन करा लिया जाए।
उन्होंने कहा कि इसके बाद कार्रवाई फिलहाल के लिए स्थगित कर दी गई। अकेलवा मस्जिद के मुतवल्ली अब्बास खान और केयरटेकर असगर खान ने बताया कि करीब 200 वर्ष पुरानी इस मस्जिद में प्रत्येक शुक्रवार को 600 से 700 लोग नमाज अदा करने आते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ी होने के बाद मस्जिद राजमार्ग के अधिक निकट दिखाई देने लगी है। हालांकि दोनों ने मस्जिद हटाए जाने संबंधी कोई आधिकारिक सूचना मिलने से इनकार किया।
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि एनएचएआई की ओर से भेजे गए पत्र के बाद मामले की जानकारी के लिए बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इस बीच ध्वस्तीकरण की तिथि निर्धारित कर दिए जाने से लोगों में भ्रम और चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा कि मंगलवार को एनएचएआई और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में पता चला कि संबंधित पक्षों को नोटिस देने समेत आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गई हैं। त्रिपाठी ने बताया कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ समन्वय करके भूमि की पैमाइश तथा अन्य तथ्यों का सत्यापन करने और संबंधित पक्षों को नोटिस देकर उनका पक्ष सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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