Chitrakoot News: दो महीने से लापता नगर पालिका कर्मी वृंदावन में बना 'साधु', भंडारे में प्रसाद बांटते हुए पुलिस ने ढूंढा
चित्रकूट, अमृत विचार: चित्रकूट से पिछले दो महीने से लापता चल रहे एक नगर पालिका कर्मचारी का मामला आखिरकार सुलझ गया है। सनसनीखेज मोड़ तब आया जब लापता कर्मचारी पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम को मथुरा-वृंदावन में साधु के भेष में मिला। इस बरामदगी के साथ ही कर्मचारी के अपहरण की तमाम आशंकाएं पूरी तरह से खारिज हो गई हैं।
बेटे ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट
मामला कर्वी के लक्ष्मणपुरी इलाके का है। यहां के रहने वाले उदय कुमार ने बीते 19 अप्रैल को कोतवाली में अपने 45 वर्षीय पिता जगदीश प्रसाद के रहस्यमयी ढंग से गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जगदीश प्रसाद नगर पालिका में कर्मचारी हैं। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें उनके संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही थीं, लेकिन हफ्तों तक उनका कोई सुराग नहीं मिला।
एक फोन कॉल और खुल गया राज
इस रहस्यमयी मामले में मोड़ 13 जून को आया, जब लापता जगदीश के साले राहुल के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को 'कृष्णा महाराज उर्फ कुलदीप' बताया। उसने राहुल को जानकारी दी कि जगदीश पिछले डेढ़-दो महीने से मथुरा में उसी के साथ रह रहा है। राहुल ने तुरंत यह बात पुलिस को बताई।
आश्रम में प्रसाद बांटते मिले 'साधु' जगदीश
सूचना मिलते ही सर्विलांस, एसओजी और कोतवाली कर्वी पुलिस की एक संयुक्त टीम 15 जून को मथुरा-वृंदावन पहुंची। सघन खोजबीन के बाद पुलिस जब वृंदावन के 'गौतम ऋषि आश्रम' पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर चौंक गई। नगर पालिका कर्मी जगदीश प्रसाद वहां साधु का भेष धारण कर भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद बांट रहे थे।
अपनी मर्जी से छोड़ा था घर
जब पुलिस ने जगदीश को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि वह किसी के दबाव या अपहरण के कारण नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से सब कुछ छोड़कर मथुरा-वृंदावन आए थे। उनका किसी ने अपहरण नहीं किया था। पुलिस ने जांच पूरी कर अपहरण की आशंकाओं को गलत पाया और कानूनी कार्रवाई के बाद उन्हें उनके परिवार के सुपुर्द कर दिया।
