G7 Summit France : फ्रांस जाते समय जिनेवा रुके पीएम मोदी, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन से की खास मुलाकात
दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्लाेवाकिया की यात्रा पूरी होने के बाद जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को फ्रांस के शहर एवियन के लिए रवाना होने के बाद कुछ देर के लिए स्विटजरलैंड के जिनेवा में रूके और हवाई अड्डे पर स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के साथ मुलाकात की।
मोदी ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी देते हुए एक पोस्ट में कहा , " कुछ देर पहले जिनेवा पहुंचा, जहां से मैं जी-7 समिट के लिए एवियन जाऊंगा। एयरपोर्ट पर स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन से मुलाकात हुई। उनके साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई।"
इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी सोशल मीडिया पर बताया कि श्री मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए एवियन जाते समय जिनेवा में रूके जहां स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया और भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-जापान ने पेरिस समझौते के तहत निर्धारित प्रदूषण संरक्षण क्रियान्वयन नियमों को अपनाया
भारत और जापान ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (जेसीएम) के कार्यान्वयन नियमों को अपनाया है, जिससे भारत में कम कार्बन प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं में निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
आधिकारिक बयान के अनुसार दोनों देशों की सरकारों ने गत आठ जून को संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के 'रूल ऑफ इम्प्लीमेंटेशन' को अपना लिया है जिसके लिए पिछले वर्ष भारत और जापान के बीच परस्पर सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किये गये थे। इस समझौते के तहत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी या उसके निष्कासन से संबंधित गतिविधियों में सहयोग के लिए एक रूपरेखा तैयार की गयी थी, जिससे भारत में सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ दोनों देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।
कार्यांवयन नियमों में मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का प्रावधान है जिसके तहत दोनों देशों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त समिति का गठन, परियोजनाओं के अनुमोदन की पारदर्शी प्रक्रिया, स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से सत्यापन और प्रमाणीकरण, सतत विकास से जुड़े सुरक्षा उपाय तथा कार्बन क्रेडिट के निर्गमन और हस्तांतरण पर नजर रखने के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों की व्यवस्था शामिल है।
पर्यावरण मंत्रालय के इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है कि संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे भारत में कम कार्बन प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं के लिए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन शमन और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
