Japan PM India Visit : राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत, जानिए जापान की PM सनाए तकाइचीस की इस यात्रा के क्या है मायने

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का बृहस्पतिवार को यहाँ राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री तकाइची की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है।

सलामी मंच पर भव्य स्वागत

राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित भव्य समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची सलामी मंच पर खड़ी हुईं, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी उनके पास मौजूद थे। मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड के दस्ते ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़कर सलामी दी।

16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगी शामिल

प्रधानमंत्री तकाइची, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। व्यापार, निवेश, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने के लिए दोनों प्रधानमंत्री बृहस्पतिवार को यहाँ 'हैदराबाद हाउस' में उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे।

औपचारिक स्वागत समारोह के संपन्न होने के बाद, प्रधानमंत्री तकाइची ने पीएम मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान कई केंद्रीय मंत्रियों ने हाथ जोड़कर तकाइची का अभिवादन किया, जिसका उन्होंने भी सहर्ष हाथ जोड़कर जवाब दिया। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और मीडिया के सामने तस्वीरें खिंचवाईं।

सोशल मीडिया पर दिखी खास बॉन्डिंग

तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को नई दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद जापान की प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपने आगमन की तस्वीरें साझा की थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी इस पोस्ट को री-शेयर करते हुए लिखा, "प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, भारत में आपका हार्दिक स्वागत है। आपकी पहली भारत यात्रा पर आपकी मेजबानी करके हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं कल आपके साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा को लेकर उत्सुक हूं, जिससे भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी और मजबूत होगी। हम अपने संयुक्त प्रयासों के जरिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उसके बाहर शांति, स्थिरता एवं समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।"

कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण यात्रा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को इस दौरे पर बात करते हुए कहा था कि यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक "महत्वपूर्ण कदम" है। मंत्रालय के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के सभी आयामों की बारीकी से समीक्षा करने और उन्हें पहले से अधिक मजबूत बनाने का मौका देगा। इसके साथ ही दोनों नेता साझा हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

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भारत और जापान ने आपसी विशेष रणनीतिक तथा वैश्विक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाते हुए आर्थिक सुरक्षा, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा भी की है। भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ यहाँ 'भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन' में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में यह जानकारी दी। पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के आज के माहौल में, दोनों देशों का आपसी विश्वास हमारी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है। उन्होंने स्वतंत्र, समृद्ध और नियम आधारित हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को दोनों देशों की साझा प्राथमिकता बताया।

10 वर्षों में 100 खरब येन का निवेश, जापानी कंपनियां होंगी दोगुनी

प्रधानमंत्री ने भारत की विकास यात्रा में जापान के ऐतिहासिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पिछले कई दशकों में ऑटोमोटिव से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, जापान हमारी प्रगति का अहम हिस्सेदार रहा है। अब इस साझेदारी को और विस्तार देते हुए दोनों देशों के बीच सहमति बनी है कि जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 100 खरब येन का भारी-भरकम निवेश करेगा। भारत में सक्रिय जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना किया जाएगा।

निवेश साझेदारी को गति देने के लिए वित्तीय सेवा एजेंसियों के बीच भी समझौता हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच पूंजी तथा निवेश का प्रवाह और सुगम होगा। पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच 100 से ज्यादा नए व्यापारिक समझौते हुए हैं और भारत में 10 अरब डॉलर से ज्यादा का जापानी निवेश आया है।

रक्षा क्षेत्र में पहली सह-विकास परियोजना: नौसैनिक रेडियो एंटीना

रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली सह-विकास परियोजना पर हस्ताक्षर किए हैं। नौसैनिक रेडियो एंटीना की यह परियोजना भारत-जापान रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में एक नया अध्याय शुरू करेगी। अब दोनों देश मिलकर ऐसी रक्षा प्रौद्योगिकियां विकसित करेंगे, जो क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करेंगी।

एआई (AI) और आर्थिक सुरक्षा के लिए संयुक्त रोड मैप

प्रौद्योगिकी को सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। भारतीय एआई इकोसिस्टम के कई प्रमुख संस्थानों ने अपने जापानी साझीदारों के साथ करार किए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जापान की सटीक प्रौद्योगिकी (Precision Technology) और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का यह संगम वैश्विक एआई विकास को नई गति और शक्ति देगा।

इसके अलावा, वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में दोनों देशों ने 'आर्थिक सुरक्षा' के लिए एक संयुक्त रोड मैप तैयार किया है। इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर, क्वांटम और उन्नत सामग्रियों (Advanced Materials) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत किया जाएगा।

ग्रामीण समृद्धि के लिए 1,000 बायोगैस संयंत्र

ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े फैसले लिए गए हैं। 'भारत-जापान बायोगैस पहल' के माध्यम से भारत में 1,000 बायोगैस और कार्बनिक फर्टिलाइजर संयंत्र लगाए जाएंगे। इससे भारत सरकार की 'गोवर्धन पहल' को मजबूती मिलेगी और गांवों में समृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका को नई शक्ति मिलेगी।

इसके साथ ही, दोनों देशों ने 'भारत-जापान नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क' भी तैयार किया है, जिसके तहत ऑटोमोटिव सेक्टर की सफलता को अब जहाजरानी (Shipping), वैमानिकी (Aviation) और लॉजिस्टिक जैसे क्षेत्रों में भी दोहराया जाएगा। वहीं फार्मा, मेडिकल डिवाइस और बायो-टेक में हुए समझौतों से दोनों देश वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में अपना योगदान देंगे।

अटूट विश्वास पर टिके हैं संबंध

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निष्कर्ष के तौर पर कहा कि भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक प्रौद्योगिकी तक, दोनों देशों की सोच और अप्रोच में समानता है, और सबसे बढ़कर हमारे संबंधों की नींव अटूट आपसी विश्वास पर टिकी है। इससे पहले, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत किया गया था।

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