अयोध्या में नया विवाद : चंपत राय पर फर्जी दस्तावेजों से राम निवास मंदिर पर कब्जे का आरोप, जानें पूरा मामला
अखिलेश यादव ने निष्पक्ष जांच की मांग; ट्रस्ट की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया
लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर परिसर के निकट स्थित प्राचीन राम निवास मंदिर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर के पंच प्रमुख हरि शंकर सफारीवाला ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके सहयोगियों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मंदिर और उससे जुड़ी संपत्ति पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, इन आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक चंपत राय या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लखनऊ में गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में हरि शंकर सफारीवाला ने दावा किया कि रामकोट स्थित प्राचीन राम निवास मंदिर का संचालन पंच समिति करती है और मंदिर के धार्मिक कार्यों के लिए समिति की ओर से एक पुजारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर जैसी अविक्रेय धार्मिक संपत्ति को बिक्री योग्य दिखाकर जाली दस्तावेज तैयार किए गए।
सफारीवाला के अनुसार, कथित तौर पर 5.80 करोड़ रुपये का सौदा दर्शाते हुए फर्जी कागजात बनाए गए और समिति द्वारा नियुक्त पुजारी तथा उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों में करीब 60 लाख रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति के सदस्यों को भी करोड़ों रुपये का लालच देकर परिसर खाली कराने की कोशिश की गई, लेकिन समिति ने इसे ठुकरा दिया।
'पंचायती मंदिर को बेचा नहीं जा सकता'
सफारीवाला ने कहा कि राम निवास मंदिर एक पंचायती मंदिर है, जिसका स्वामित्व किसी एक व्यक्ति के पास नहीं है। ऐसे में समिति का कोई भी सदस्य मंदिर या उसकी संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं रखता। इसके बावजूद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जे की साजिश रची गई।
50 करोड़ की जमीन और चढ़ावे का भी उठाया सवाल
मंदिर के पंच प्रमुख ने दावा किया कि मंदिर और उससे जुड़ी जमीन की मौजूदा कीमत करीब 50 करोड़ रुपये है तथा पिछले पांच वर्षों से यह कथित रूप से आरोपित पक्ष के नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान श्रद्धालुओं से मिले लाखों रुपये के दान और चढ़ावे का कोई हिसाब समिति को नहीं दिया गया, जबकि कई बार जानकारी मांगी गई।
'पीएम-सीएम तक भेजी शिकायत'
सफारीवाला ने कहा कि मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा है।
अखिलेश बोले- निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो
प्रेसवार्ता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और सरकार को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं स्वतंत्र जांच करानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। प्रेसवार्ता में अयोध्या के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडे भी उपस्थित रहे।
क्या हैं मुख्य आरोप?
- फर्जी दस्तावेजों के जरिए राम निवास मंदिर पर कब्जे की कोशिश का आरोप।
- 5.80 करोड़ रुपये का कथित फर्जी सौदा दिखाने का दावा।
- पुजारी और उसके रिश्तेदारों के खातों में करीब 60 लाख रुपये भेजने का आरोप।
- मंदिर समिति को करोड़ों रुपये का प्रलोभन देने का आरोप।
- मंदिर के दान-चढ़ावे का हिसाब नहीं देने का भी दावा।
- मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से किए जाने का दावा।
