Kanpur News : खेत तालाब बना कमाई का नया जरिया, कानपुर में मोती की खेती का अनोखा मॉडल देखने पहुंचे डीएम
8-20 लाख का निवेश, 50 लाख तक की कमाई का अनुमान
कानपुर के सम्भुआ गांव में खेत तालाब में मोती की खेती और मत्स्य पालन का अनोखा प्रयोग किसानों के लिए नई मिसाल बन रहा है। डीएम ने परियोजना का निरीक्षण कर इसे आय बढ़ाने वाला मॉडल बताया। 30 हजार सीपियों से करीब 50 लाख रुपये के मोती तैयार होने का अनुमान है।
कानपुर, अमृत विचार। खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड के सम्भुआ गांव में खेत तालाब में मोती की खेती (Pearl Farming) और मत्स्य पालन का अभिनव मॉडल तैयार किया गया है, जो किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नई उम्मीद जगा रहा है। रविवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव पहुंचकर इस परियोजना का निरीक्षण किया और किसानों से इसकी तकनीक एवं संभावित आय की जानकारी ली।
30 हजार सीपियों से तैयार होंगे डिजाइनर मोती
परियोजना से जुड़े किसानों ने बताया कि तालाब में करीब 30 हजार सीपियां डाली गई हैं। प्रत्येक सीपी से दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें विशेष मोल्ड तकनीक का उपयोग कर स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों और अन्य आकर्षक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में सामान्य मोतियों की तुलना में अधिक मांग रहती है।
18-20 लाख का निवेश, 50 लाख तक की कमाई का अनुमान
परियोजना पर करीब 18 से 20 लाख रुपये का निवेश किया गया है। किसानों के अनुसार तैयार होने वाले मोतियों की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये होगी। इसके अलावा तालाब में मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।

सरकारी अनुदान से मिली नई शुरुआत
सम्भुआ गांव निवासी रश्मि वर्मा ने अपने खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा खेत तालाब बनवाया है। यह कार्य राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भूमि संरक्षण अनुभाग के सहयोग से हुआ, जिसमें उन्हें तालाब निर्माण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 52,500 रुपये) का अनुदान डीबीटी के माध्यम से मिला। कृषि विभाग और मणि एग्रो हब से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने मोती की खेती शुरू की। वर्तमान में परियोजना को लगभग नौ महीने पूरे हो चुके हैं और करीब 18 माह बाद मोती पूरी तरह तैयार हो जाएंगे।
विशेष तकनीक से तैयार हो रहे डिजाइनर पर्ल
इस परियोजना में चयनित सीपियों के भीतर विशेष सांचे (मोल्ड) प्रत्यारोपित किए गए हैं। सीपी प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत इन सांचों पर मोती की परत चढ़ाती है, जिससे धार्मिक और सजावटी आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार होते हैं। ऐसे मोतियों की बाजार में अधिक कीमत मिलने की संभावना रहती है।
किसानों की आय बढ़ाने का नया मॉडल
जिलाधिकारी ने परियोजना का अवलोकन करते हुए इसे किसानों की आय बढ़ाने वाला नवाचार बताया। उन्होंने कहा कि यदि इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो खेत तालाब केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए बेहतर आमदनी का स्रोत भी बन सकते हैं।
