Gupt Navratri 2026 : 15 जुलाई से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि, जानें तंत्र साधना, महाविद्याओं की पूजा और धार्मिक महत्व
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से 23 जुलाई तक चलेगा नौ दिवसीय पर्व, साधक करेंगे विशेष तंत्र-मंत्र साधना और मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की आराधना
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से 15 जुलाई को गुप्त नवरात्रि शुरू होगी, जो 23 जुलाई तक चलेगी। इस दौरान मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ तंत्र-मंत्र साधना, महाविद्याओं की आराधना और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार गुप्त नवरात्रि संतों और साधकों की साधना का पर्व है। मान्यता है कि इस अवधि में दस महाविद्याओं की उपासना, "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे" मंत्र का जाप और गुप्त साधना से सिद्धि, मनोकामना पूर्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति का विशेष फल प्राप्त होता है।
अमृत विचार। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इस वर्ष 15 जुलाई, बुधवार से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा। नौ दिनों तक चलने वाला यह विशेष पर्व 23 जुलाई तक मनाया जाएगा। गुप्त नवरात्रि के दौरान मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के साथ तांत्रिक साधना, विशेष अनुष्ठान और गुप्त उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवधि में साधक महाविद्या तंत्र साधना के माध्यम से सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, जबकि श्रद्धालु विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार, चैत्र और शारदीय नवरात्रि जहां गृहस्थों और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख मानी जाती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि संतों, सिद्धों और साधकों की साधना का पर्व है। यह उत्सव से अधिक तप, ध्यान और साधना का काल माना जाता है। इस दौरान विशेष रूप से तंत्र-मंत्र की सिद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए साधना की जाती है।
उन्होंने बताया कि गुप्त नवरात्रि में विधि-विधान से पूजा करने पर अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। विशेष रूप से अघोर और तांत्रिक साधक इस अवधि में महाविद्याओं की आराधना कर सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मोक्ष की कामना रखने वाले साधकों के लिए भी यह नवरात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
तंत्र साधना के लिए सबसे विशेष मानी जाती है गुप्त नवरात्रि
तांत्रिक साधकों को पूरे वर्ष गुप्त नवरात्रि का इंतजार रहता है। इस दौरान वे दीर्घकालीन साधना और विशेष अनुष्ठानों के माध्यम से दुर्लभ आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्रि में साधक मुख्य रूप से मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की उपासना करते हैं। इन दस स्वरूपों को दस महाविद्या कहा जाता है।
साल में केवल दो बार आती है गुप्त नवरात्रि
पं. द्विवेदी के अनुसार गुप्त नवरात्रि वर्ष में केवल दो बार आती है। पहली माघ मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में। कम लोगों को इसकी जानकारी होने और इसकी साधना गुप्त रूप से किए जाने के कारण इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान विशेष मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गुप्त नवरात्रि को गायत्री नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी दुर्गा का आह्वान किया जाता है। श्रद्धालु धन, ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से देवी की विशेष आराधना करते हैं।
इस महामंत्र के जाप का है विशेष महत्व
गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक विशेष रूप से इस महामंत्र का जाप करते हैं—
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे"
धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से साधक को आध्यात्मिक ऊर्जा, सिद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गुप्त साधना और मानसिक जाप को मिलता है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी बताते हैं कि चैत्र और आश्विन नवरात्रि जहां गृहस्थ साधकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि सिद्ध पुरुषों, संतों और ऋषि-मुनियों की साधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दौरान साधक मन, वचन और कर्म से दस महाविद्याओं के मंत्रों का जाप करते हैं। मानसिक जाप को अधिक प्रभावी माना जाता है और साधना को पूर्णतः गुप्त रखा जाता है।
साधक एकांत में ध्यान, मंत्र-जाप और आराधना करते हैं। मंत्र सिद्धि और तंत्र सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्रि की अवधि अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती है। सामान्य नवरात्रि व्रत के नियम अपेक्षाकृत सरल होते हैं, लेकिन दस महाविद्याओं की साधना के नियम अत्यंत कठोर बताए गए हैं। इनका पूर्ण पालन केवल सिद्ध संत और अनुभवी साधक ही कर पाते हैं। पं. द्विवेदी के अनुसार गुप्त नवरात्रि में साधक अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति के उद्देश्य से भी विशेष साधना और आराधना करते हैं।
