संसद सत्र में टकराव टालने के लिए सूझबूझ जरूरी, युवाओं के मुद्दों पर सरकार उठाए ठोस कदम: मायावती
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सभी राजनीतिक दलों से टकराव से बचने और बेहतर सूझबूझ का परिचय देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक हालात को देखते हुए संवाद के जरिए समाधान निकालना जरूरी है। मायावती ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि संसद से लेकर सड़कों और दिल्ली के जंतर-मंतर तक कई ज्वलंत मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात को समझदारी और सकारात्मक सोच के साथ टाला जाना चाहिए।
पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं पर जताई चिंता
बसपा प्रमुख ने स्वास्थ्य सेवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन समस्याओं से युवाओं और बेरोजगारों में अनिश्चितता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह देश और जनहित से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर सरकारों को तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। मायावती ने कहा कि युवा पीढ़ी का भविष्य किसी भी तरह की अनिश्चितता और अंधकार से बचाना जरूरी है।
सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की अपील
मायावती ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि परिवार बेहतर शिक्षा के लिए महंगाई के बावजूद लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से कोचिंग संस्थानों पर प्रभावी और भ्रष्टाचार मुक्त निगरानी रखने की अपील की। साथ ही प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
युवाओं के रोजगार और आंदोलनों पर भी बोलीं मायावती
बसपा प्रमुख ने संविदा और अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि युवा अस्थायी रोजगार से आगे बढ़कर स्थायी और सम्मानजनक नौकरी चाहते हैं, जिससे वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर सकें। उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर समय रहते गंभीरता से ध्यान दिया जाए तो उन्हें आंदोलन जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
मायावती ने सरकार से आंदोलनकारियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल जीडीपी वृद्धि से देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है, बल्कि शिक्षित, सुरक्षित और कल्याणकारी भारत का निर्माण ही वास्तविक विकास का आधार होना चाहिए।
