Cannes Film Festival में 'September 21' का प्रीमियर, अल्जाइमर पर बनी भारतीय फिल्म मई में होगी रिलीज

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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मुंबई। फिल्म 'सितंबर 21' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखने वाली करेन क्षिति सुवर्णा का कहना है कि यह फिल्म बनाने का उद्देश्य इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों के बजाय उनकी देखभाल करने वालों के अनुभव को प्रमुखता से सामने लाना था। हिंदी-कन्नड़ फिल्म 'सितंबर 21' डिमेंशिया से पीड़ित एक पिता (प्रवीण सिंह सिसोदिया) और उनके बेटे (रिकी रुद्र) की कहानी है जिसमें पुत्र अपने सपनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उलझ जाता है। 

हिंदी सिनेमा में पहले भी अल्जाइमर पर "यू मी और हम", "मै" और "गोल्डफिश" जैसी फिल्में बनी हैं जिनमें मुख्य रूप से मरीजों और उनके अनुभवों पर ध्यान केंद्रित किया गया। लेकिन 'सितंबर 21' में उस भावनात्मक दबाव को दिखाया गया है जिसका सामना मरीज की देखभाल करने वाला (केयरगिवर) करता है और यह पक्ष अक्सर अनदेखा रह जाता है। सुवर्णा ने कहा, "ये फिल्में बेहतरीन उदाहरण हैं, लेकिन वे अल्जाइमर को एक विषय के रूप में मरीजों के नजरिए से दिखाती हैं। हमने इसे देखभाल करने वालों की नजर से दिखाने का फैसला किया।" 

उन्होंने कहा, "हमने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के केयरगिवर को दिखाया है—कुछ रिश्तेदार होते हैं, तो कुछ लोग केवल पैसे के लिए काम करते हैं और भावनात्मक रूप से जुड़े नहीं होते।" उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्मों "द फादर" और "स्टिल एलाइस" का उदाहरण देते हुए कहा कि इन फिल्मों ने भी अल्झाइमर को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया है। सुवर्णा (22) ने उम्मीद जताई कि उनकी फिल्म अल्जाइमर और उससे जुड़ी भावनात्मक जटिलताओं पर जागरूकता बढ़ाएगी और चर्चा को प्रेरित करेगी। 

युवा निर्देशक के अनुसार, अल्जाइमर एक 'न्यूरोडीजेनेरेटिव' बीमारी है, जिसका अभी तक कोई निश्चित इलाज नहीं है, और यही वजह है कि ऐसे मरीजों की देखभाल की प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण और मानवीय बन जाती है। उन्होंने कहा, "इस कहानी के जरिए मैं यह संदेश देना चाहती थी कि अगर मैं इलाज नहीं कर सकती, तो देखभाल जरूर कर सकती हूं। यह पूरी तरह देखभाल पर आधारित है—जब मरीज कभी-कभी बच्चों की तरह व्यवहार करने लगते हैं, तो उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।" उन्होंने कहा, "केयरगिवर के लिए यह स्थिति मुश्किल होती है और कभी-कभी धैर्य भी टूट सकता है। 

फिल्म में हमने दिखाया है कि ऐसे हालात में वे भावनात्मक और व्यावहारिक फैसले कैसे लेते हैं।" सुवर्णा ने बताया कि फिल्म की कहानी लेखक राज शेखर और निर्माता अशोक देवनामप्रिय तथा रमेश भंडारी के व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरित है। शूटिंग से पहले सुवर्णा ने बेंगलुरु के केयर सेंटर का दौरा भी किया।

उन्होंने कहा, "यह एक संवेदनशील विषय है। मैं चाहती थी कि इसे परिपक्वता और तथ्यात्मक सटीकता के साथ प्रस्तुत किया जाए।" 'सितंबर 21' का विश्व प्रीमियर 16 मई को कान फिल्म महोत्सव के तहत पलाइस थिएटर, कान में होगा। सुवर्णा ने कान में फिल्म के प्रदर्शन को अपने लिए "बड़ी उपलब्धि" बताया। यह फिल्म 22 मई को भारत में रिलीज होगी, जबकि 31 मई को दुबई में इसका प्रीमियर निर्धारित है। 

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