महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा में संग्राम : निंदा प्रस्ताव के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक, रिकॉर्ड से हटे बयान

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर सियासी टकराव चरम पर दिखा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लाए गए निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विपक्ष के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कई बार माहौल गर्म हो गया। चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बीच तीखी बहस देखने को मिली। वहीं, मंत्री आशीष पटेल ने कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। इस पर आराधना मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य “कांग्रेस की देन” है और कई नेता उसी पृष्ठभूमि से निकले हैं।

सपा विधायक रागिनी सोनकर ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दे का राजनीतिक उपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने सदन में कविता के माध्यम से अपनी बात रखते हुए महिलाओं की स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि नारी को नारा बनाकर राजनीति की जा रही है। इससे पहले सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा और सपा विधायकों के बीच नारेबाजी भी हुई। सपा विधायक पल्लवी पटेल ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है और परिसीमन की शर्त जोड़कर इसे टालने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने जनगणना में देरी को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया। वहीं, मंत्री असीम अरुण ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लंबे इंतजार की जरूरत नहीं है और अन्य देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने अधिक प्रतिनिधित्व की वकालत की। सत्र के दौरान मंत्री संजय निषाद और विजय लक्ष्मी गौतम ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए महिला आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर अपनी-अपनी बात रखी।

उल्लेखनीय है कि सरकार निंदा प्रस्ताव के जरिए विपक्ष पर महिला आरक्षण में बाधा डालने का आरोप लगा रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि विधेयक पहले ही पारित हो चुका है और सरकार उसे लागू करने में देरी कर रही है। सदन की कार्यवाही के दौरान बार-बार हंगामे और तीखी टिप्पणियों के बीच महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक केंद्र में बना रहा।

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