Moradabad:राष्ट्रीय चेतना स्मारक में दिखेगी भारत की वैचारिक विरासत
विनोद श्रीवास्तव, मुरादाबाद। भारतीय संविधान के 75 वर्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर महानगर को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि मिली है। नगर निगम की पहल पर स्मार्ट सिटी में कराए गए राष्ट्रीय चेतना स्मारक में भारत की वैचारिक और ऐतिहासिक विरासत के साथ ही एक भारत, श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को और मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विशिष्ट कार्य पद्धति को विस्तार से दर्शाया गया है।
मुरादाबाद-दिल्ली रोड पर निर्मित किए गए राष्ट्रीय चेतना स्मारक को भारतीय संविधान के 75 वर्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बनाया गया है। नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे की थीम पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विशिष्ट कार्य पद्धति और अखंड भारत की संकल्पना के प्रति प्रतिबद्धता की झलक इस स्मारक में दिख रही है। इस स्मारक में देश की आजादी के संघर्ष और भारतीय विकास की गाथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महापुरुषों के योगदान व उनकी वैचारिकी को दर्शाया गया है। जिससे वर्तमान के साथ ही भावी पीढ़ी को भी वैचारिक ज्ञान व दर्शन यहां मिलेगा। इसके केंद्र में अखंड भारत की संकल्पना समाहित है। देश के महापुरुषों की कार्य पद्धति के विवरण के माध्यम से विभिन्न वैचारिक धाराओं के सम्मिलन से बनी भारत की राष्ट्र चेतना को राष्ट्रीय चेतना स्मारक में दर्शाया गया है। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि दिल्ली, लखनऊ व अन्य जिलों से आने वालों को भी यहां भारत की वैचारिक विरासत का दर्शन होगा।
इन महापुरुषों का दर्शाया गया है योगदान
राष्ट्रीय चेतना स्मारक में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, शाहूजी महाराज, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की गौरवगाथा दर्शित है।
नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बताया कि राष्ट्रीय चेतना स्मारक के केंद्र में स्थित अखंड भारत की संकल्पना और संविधान व तिरंगा लिए भारत माता की प्रतिमा हमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत की संकल्प की सिद्धि के लिए अनवरत प्रयास करने के लिए प्रेरणा देती है। यहां देश के महापुरुषों की वैचारिक विरासत का दर्शन होगा।
