UP बनेगा ग्लोबल एआई हब... डाटा सेंटर क्लस्टर की समीक्षा में बोले सीएम योगी- लखनऊ को करें 'एआई सिटी' के रूप में विकसित

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश की भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन अहम प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। सीएम योगी ने कहा कि यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। 

उन्होंने निर्देश दिया कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल एनसीआर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए। इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र से की जा सकती है जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने टाटा समूह समेत बड़ी टेक कंपनियों से संवाद कर लखनऊ को 'एआई सिटी' के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। '

प्रोजेक्ट गंगा' यानी गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चुने गए डिजिटल उद्यमियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण करने वाली कंपनियां भी इन युवाओं का उपयोग कर सकें, ऐसी व्यवस्था बनाई जाए। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और पारदर्शिता पर जोर देते हुए उन्होंने डिजिटल उद्यमियों को शुरुआत से ही इंसेंटिव देने को कहा। 

प्रोजेक्ट गंगा के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर बनाया जाएगा, जिससे 50 हजार प्रत्यक्ष और 1 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। 20 लाख से अधिक घरों को फाइबर आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा। योजना में 50% महिला उद्यमियों को जोड़ने का लक्ष्य है। यह प्रोजेक्ट फिलहाल 21 जिलों में पायलट के तौर पर शुरू होगा।

मुख्यमंत्री ने गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी टैक्स और मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाया जाए। मंडियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, त्योहारों पर लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्यान्न सुरक्षा के लिए प्रदेश को अभी से तैयार रहना होगा।

यूपी देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। 2025-26 में 372 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। प्रदेश में 559 रोलर फ्लोर मिल्स हैं जिनकी क्षमता 218.4 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन उपयोग सिर्फ 126.45 लाख मीट्रिक टन हो रहा है। समिति ने सुझाव दिया कि यूपी में पंजीकृत मिलों द्वारा राज्य के भीतर प्रसंस्करण के लिए खरीदे गए गेहूं पर मंडी शुल्क और विकास उपकर में छूट दी जाए, लेकिन यह छूट व्यापारिक गतिविधियों पर लागू न हो। 

बैठक में बताया गया कि यूपी की भौगोलिक स्थिति इसे समुद्री जोखिमों से सुरक्षित बनाती है। एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर, एनआईटी प्रयागराज और 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों के कारण विशाल तकनीकी प्रतिभा उपलब्ध है। देश के लगभग सभी प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं।  

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