Moti Samvardhan Yojana: यूपी में मछली पालन के साथ अब मोती उत्पादन, योगी सरकार ने जारी किया शासनादेश
-यूपी में शुरू होगी ‘मोती संवर्धन योजना’, बढ़ेगी किसानों की आमदनी - 3 करोड़ से शुरू होगी योजना
लखनऊ, अमृत विचार: योगी सरकार ने मत्स्य पालन और ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “उत्तर प्रदेश मोती संवर्धन योजना” शुरू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मत्स्य विभाग ने गुरुवार को विस्तृत शासनादेश जारी कर दिया है। योजना के तहत प्रदेश के चयनित जिलों में तालाबों में सीप (मसल्स) आधारित मोती उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए तीन करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।
विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, योजना का उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध अनुपयोगी जल स्रोतों का उपयोग कर स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में योगदान देना है। सरकार का मानना है कि गंगा एवं यमुना नदी के क्षेत्रों में सीप (मसल्स) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग मोती उत्पादन के लिए किया जा सकता है। योजना को तीन श्रेणियों में लागू किया जाएगा।
पहली श्रेणी में 440 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले खेत तालाबों में 2000 सीप डालकर मोती उत्पादन किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 1.50 लाख रुपये होगी। दूसरी श्रेणी में 0.5 से एक एकड़ तक के निजी तालाबों में 5000 सीप डाले जाएंगे, जिसकी लागत 3.50 लाख रुपये तय की गई है। तीसरी श्रेणी में एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले तालाबों में 15000 सीप डालकर मोती उत्पादन किया जाएगा, जिसकी लागत 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
शासनादेश में बताया गया है कि योजना 40 प्रतिशत राज्यांश और 60 प्रतिशत लाभार्थी अंश के फंडिंग पैटर्न पर आधारित होगी। पहले चरण में इसे कुछ चयनित मंडलों में क्लस्टर मॉडल पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। एक फसल (हार्वेस्ट) के बाद योजना के विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मोती संवर्धन तकनीकी रूप से संवेदनशील कार्य है, इसलिए चयनित लाभार्थियों के तालाबों में सीप प्रत्यारोपण और प्रबंधन का कार्य मत्स्य विभाग द्वारा सूचीबद्ध इम्पैनल्ड एजेंसियों के माध्यम से कराया जाएगा। इम्पैनल्ड संस्थाओं की सूची विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
सीडीओ की अध्यक्षता में समिति चयनित करेगी लाभार्थी
शासनादेश में लाभार्थी चयन की विस्तृत प्रक्रिया भी तय की गई है। इसके लिए जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी, जिसमें मत्स्य विभाग, बैंक और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे। आवेदन विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन लिए जाएंगे। चयन में मोती पालन का अनुभव रखने वाले और मत्स्य पालन में सक्रिय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
तालाब में एरेटर और ऑक्सीजन सिस्टम लगाना अनिवार्य
योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को तालाब में एरेटर और ऑक्सीजन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही परियोजना अवधि में नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की गई है। शासनादेश के अनुसार लाभार्थियों को कार्य की प्रगति रिपोर्ट विभागीय कार्यालय में उपलब्ध करानी होगी। शासनादेश में अनुमानित आय का भी उल्लेख किया गया है। 2000 सीप वाली इकाई से लगभग 90 हजार रुपये, 5000 सीप वाली इकाई से करीब 2.50 लाख रुपये और 15000 सीप वाली इकाई से लगभग 8 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है।
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