एक दिल... और उसके साथ दौड़ती रही कई जिंदगियांः Vande Bharat से पहली बार सूरत से अहमदाबाद पहुंचा ‘जिंदा दिल’, ग्रीन कॉरिडोर ने बचाई उम्मीद

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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217 मिनट की जिंदगी की दौड़

सूरत के 36 वर्षीय ब्रेन-डेड टेक्सटाइल वर्कर के परिवार ने किया अंगदान; मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत से 3 घंटे 45 मिनट में अहमदाबाद पहुंचा हार्ट, अस्पताल तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

अहमदाबाद/डिजिटल डेसकः किसी के लिए यह सिर्फ 217 मिनट की ट्रेन यात्रा थी, लेकिन किसी और के लिए यही समय जिंदगी और मौत के बीच की सबसे अहम दूरी बन गया। भारतीय रेलवे ने देश में पहली बार ट्रेन के जरिए एक जीवित हृदय को सफलतापूर्वक सूरत से अहमदाबाद पहुंचाया, ताकि उसे यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में ट्रांसप्लांट किया जा सके।

यह सफर मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 20901) से पूरा हुआ। दिल को निर्धारित समय सीमा के भीतर अहमदाबाद पहुंचाने के लिए रेलवे, आरपीएफ, गुजरात पुलिस और मेडिकल टीमों ने मिलकर एक ऐसा ऑपरेशन चलाया, जिसमें हर मिनट कीमती था।

'Live human heart' transported via Vande Bharat Express for the first time. (1)

सूरत से चला दिल, अहमदाबाद में इंतजार कर रही थी एक जिंदगी

यह हार्ट सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल (NCH) में ओडिशा के 36 वर्षीय टेक्सटाइल वर्कर से निकाला गया था। वह सूरत जिले के किम में किराए के मकान में रहता था।

28 जुलाई को उसकी तबीयत अचानक गंभीर हो गई। हालत बिगड़ने के साथ उसका चेहरा एक तरफ मुड़ गया और हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया। पहले उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद बेहतर उपचार के लिए 108 एंबुलेंस से न्यू सिविल हॉस्पिटल, सूरत पहुंचाया गया। 30 जुलाई को चिकित्सकीय जांच के बाद मेडिकल टीम ने उसे ब्रेन-डेड घोषित किया।

परिवार ने लिया ऐसा फैसला, जिससे चार लोगों को मिल सकती है नई जिंदगी

ब्रेन-डेड घोषित किए जाने के बाद परिवार को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया गया। अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट, वॉलंटियर इकबाल कदीवाला और काउंसलर निर्मला कथुडे ने परिवार की काउंसलिंग की।

परिवार की सहमति के बाद उसके हृदय, दोनों किडनी और लिवर का दान किया गया। अधिकारियों के मुताबिक इन अंगों से चार मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है। यह न्यू सिविल हॉस्पिटल, सूरत की ओर से किया गया 96वां अंगदान था।

'Live human heart' transported via Vande Bharat Express for the first time. (2)

एक परिवार ने अपने सबसे कठिन समय में जो फैसला लिया, उसने दूसरे परिवारों के लिए उम्मीद का दरवाजा खोल दिया।

3 घंटे 45 मिनट में तय हुआ 217 मिनट का सफर

हृदय को सूरत से अहमदाबाद तक पहुंचाना इस पूरे मिशन की सबसे बड़ी चुनौती थी। ऑर्गन ट्रांसप्लांट में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और इसी वजह से परिवहन का ऐसा माध्यम चुना गया, जिससे देरी की संभावना कम हो।

दिल को ट्रेन नंबर 20901 वंदे भारत एक्सप्रेस से अहमदाबाद पहुंचाया गया। सूरत से अहमदाबाद तक इस यात्रा में लगभग 217 मिनट यानी 3 घंटे 45 मिनट लगे।

ट्रेन की समयनिष्ठता और तेज गति ने इस जीवनरक्षक मिशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

'Live human heart' transported via Vande Bharat Express for the first time.

अहमदाबाद स्टेशन से अस्पताल तक बना ग्रीन कॉरिडोर

वंदे भारत के अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद मिशन का दूसरा महत्वपूर्ण चरण शुरू हुआ।

आरपीएफ और गुजरात पुलिस ने प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। इस विशेष रूट का उद्देश्य दिल को बिना किसी अनावश्यक रुकावट के अस्पताल तक पहुंचाना था।

रेलवे स्टेशन से अस्पताल तक की यह यात्रा भी समय के खिलाफ दौड़ थी, क्योंकि ट्रांसप्लांट के लिए अंग को तय समय सीमा के भीतर मेडिकल टीम तक पहुंचाना जरूरी था।

लिवर और किडनी सड़क मार्ग से भेजे गए

अंगों के परिवहन के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। लिवर और दोनों किडनी को सड़क मार्ग से अहमदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीजेज एंड रिसर्च सेंटर (IKDRC) पहुंचाया गया।

वहीं, हृदय को ट्रेन के जरिए यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर ले जाया गया।

इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय रेलवे, गुजरात पुलिस, आरपीएफ, डॉक्टरों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों और अन्य अधिकारियों ने एक साथ काम किया।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने टीम को दी बधाई

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस जीवनरक्षक प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है और वंदे भारत की तेज रफ्तार से सूरत से अहमदाबाद तक जीवित हृदय को कुछ ही घंटों में पहुंचाना इस प्रयास की सफलता में अहम रहा।

उन्होंने डॉक्टरों की टीम को 77 सफल हार्ट ट्रांसप्लांट ऑपरेशन पूरे करने के लिए भी बधाई दी।

रेलवे के लिए भी गर्व का क्षण

अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने इस अभियान को भारतीय रेलवे के लिए गर्व और संतोष का क्षण बताया।

उन्होंने कहा कि वंदे भारत के जरिए लाइव हार्ट को सुरक्षित और समय पर पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। रेलवे, आरपीएफ, गुजरात पुलिस और मेडिकल टीमों के बीच बेहतर तालमेल से यह मिशन सफल हुआ।

उन्होंने इसे केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में योगदान देने वाली सेवा और मानवता का महत्वपूर्ण कार्य बताया।

जब ट्रेन सिर्फ यात्रियों को नहीं, एक जिंदगी को लेकर दौड़ी

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी तस्वीर सिर्फ रेलवे की उपलब्धि नहीं है। इसके केंद्र में एक परिवार का वह फैसला है, जिसने अपने अपनों को खोने के दर्द के बीच अंगदान के जरिए किसी और के जीवन की उम्मीद बचाई।

एक ओर सूरत में परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला लिया, दूसरी ओर डॉक्टरों ने अंग निकाले, रेलवे ने समय पर परिवहन की जिम्मेदारी संभाली, आरपीएफ और गुजरात पुलिस ने रास्ता सुरक्षित किया और अहमदाबाद में मेडिकल टीम ने ट्रांसप्लांट की तैयारी की।

इस तरह एक दिल ने सूरत से अहमदाबाद तक सिर्फ 217 मिनट का सफर तय नहीं किया, बल्कि कई लोगों की उम्मीदों को अपने साथ आगे बढ़ाया।

देश में मेडिकल इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स के लिए नया रास्ता

ट्रेन के जरिए लाइव हार्ट को ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचाने की यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के लिए एक नया उदाहरण है। इससे यह भी सामने आया है कि रेलवे नेटवर्क का इस्तेमाल यात्री और माल परिवहन के अलावा समय-संवेदनशील मेडिकल लॉजिस्टिक्स के लिए भी किया जा सकता है।

इस मिशन में सबसे अहम सबक यही है—अंगदान से मिली जिंदगी को बचाने के लिए सिर्फ डॉक्टर नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम एक साथ दौड़ता है।

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