बरेली: बिहारीपुर कासगरान में बापू की अस्थियों की भस्म को मिलाकर स्थापित हुई थी प्रतिमा

बरेली: बिहारीपुर कासगरान में बापू की अस्थियों की भस्म को मिलाकर स्थापित हुई थी प्रतिमा

बरेली, अमृत विचार। अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की दो अक्टूबर को 153वीं जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलनों के समय देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचकर लोगों को शांति और सद्भभावना का पाठ पढ़ाया। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई। बापू की अंत्येष्टि के बाद …

बरेली, अमृत विचार। अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की दो अक्टूबर को 153वीं जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलनों के समय देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचकर लोगों को शांति और सद्भभावना का पाठ पढ़ाया। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई। बापू की अंत्येष्टि के बाद अस्थियों का विसर्जन किया गया। बरेली से उनके जुड़ाव को देखते हुए उनकी स्मृति के लिए भस्म का कुछ हिस्सा लाकर बरेली के बिहारीपुर कसगरान में गांधी भस्म स्मारक का निर्माण कराया गया।

गांधी भस्मी स्मारक समिति के महामंत्री सुनील चौधरी ने बताया कि इस स्मारक का निर्माण सिटी स्टेशन स्थित महात्मा गांधी स्कूल में अध्यापक भूप नारायण आर्य ने वर्ष 1970 में कराया था। उनके परिजनों के अनुसार वह महात्मा गांधी से काफी प्रभावित थे। जब गांधी जी का अंतिम संस्कार होना था तो भूप नारायण दिल्ली के राजघाट पहुंचे और उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

अंतिम संस्कार के बाद वह वहां से गांधी जी की भस्म का कुछ हिस्सा बरेली ले आए। भूप नारायण आर्य अपने साथी मैकूलाल के साथ मिलकर बापू का स्मारक बनवाकर मिट्टी की मूर्ति स्थापित की। बाद में 1970-71 के बाद पहले स्थापना दिवस पर मिट्टी की मूर्ति की जगह संगमरमर की मूर्ति स्थापित की गई। जिसको गांधी भस्म स्मारक नाम दिया गया।

सरकारी व्यवस्था के तहत जयंती पर आती है बस एक माला

गांधी भस्मी स्मारक समिति के पदाधिकारी अनिल चौधरी बताते हैं कि जिला प्रशासन व नगर निगम को लगातार इसके जीर्णोंद्धार के लिए ज्ञापन दिया गया। इस संबंध में कई बार अधिकारियों ने निरीक्षण किया, मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। सरकारी व्यवस्था के तहत प्रत्येक जयंती पर नगर निगम की ओर से बस एक माला आती है।

प्रत्येक रविवार को होता है हवन

महामंत्री सुनील चौधरी बताते हैं कि स्मारक में 1970 से लगातार प्रत्येक रविवार को परिसर की धुलाई के साथ ही हवन कराया जाता है। स्वास्थ्य खराब होने के चलते बीते तीन माह से हवन नहीं हो पा रहा है। हालांकि जयंती पर विशेष कार्यक्रम भी होता है। उन्होंने बताया कि कुछ स्कूलों की ओर से भी बच्चों को बापू के संबंध में जानकारी देने के उद्देश्य से स्मारक का भ्रमण कराया जाता है।

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