अयोध्या : हिम्मत हो तो ही आएं शहर, नहीं तो जाम में रो देंगे  

बेरोजगारी बढ़ते ही शहर में ई-रिक्शा व ठेले-खुमचों की भरमार, संकरे हो गए मार्ग 

अयोध्या : हिम्मत हो तो ही आएं शहर, नहीं तो जाम में रो देंगे  

चौक, फतेहगंज, मकबरा, गुदड़ी बाजार आदि चौराहों पर मिनटों में लगता है जाम, चींटियों की तरह रेंगते हैं

अमृत विचार, अयोध्या। करोड़ों-अरबों की परियोजनाओं से लैस अयोध्या सिटी इन दिनों भारी-भरकम जाम से जूझ रही है। जुड़वा शहर के मुख्य चौराहों पर जाम की समस्या आम हो गई है। वाहन छोड़िए पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। इन सबका सबसे प्रमुख कारण कहीं न कहीं बेरोजगारी भी है। क्योंकि इसके बढ़ते ही बेरोजगारों ने ई-रिक्शा थाम लिया।

शहर के मुख्य मार्गों पर ठेले-खुमचे लगाने लगे, जिस कारण सड़कें संकरी हो गईं। यही नहीं शहर में 99 प्रतिशत बने बड़े-बड़े शॉपिंग कांपलेक्स भी जाम के लिए जिम्मेदार हैं। कांपलेक्स के बेसमेंट जो पार्किंग होनी चाहिए उसमें दुकानें चल रही, जिस कारण ग्राहकों के वाहन सड़कों पर ही बेतरतीब ढंग से खड़े होते हैं और जाम लग जाता है। ये हाल तब है जब यहां आए दिन माननीयों का तांता लगा रहता है और वे हर बार अयोध्या को सुधारने की नसीहतें देकर जाते हैं।

राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से अयोध्या में न सिर्फ तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ी है बल्कि शहर का विस्तार होने के साथ आबादी भी बढ़ी है। आबादी के साथ चार पहिया और दो पहिया वाहनों में भी भारी इजाफा हुआ है। साथ ही पैडल रिक्शे की जगह आवश्यकता से अधिक ई-रिक्शों की भरमार हो गई है। शहर के मुख्य मार्गों की बात करें तो रात में 12 से सुबह 6 बजे तक चौड़ी दिखने वाली सड़कें दिन में संकरी हो जाती हैं। क्योंकि इन मार्गों पर ठेले-खुमचों की संख्या पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

ई-रिक्शा वाले आउट ऑफ कंट्रोल हो गए हैं। जुड़वा शहर के चौक, फतेहगंज, मकबरा, नाका, गुदड़ी बाजार, देवकाली, रीडगंज, लालबाग, कसाबबाड़ा, खिड़की अली वेग, अल्का टावर व हनुमानगढ़ी, नया घाट, डाकखाना चौराहा, दंतधावन कुंड आदि चौराहों पर काफी संख्या में ई-रिक्शा वालों की वजह से जाम लग जाता है। इन्हीं चौराहों पर ई-रिक्शा वाले दिन भर सवारियों को ढोते हैं। सवारियों की तलाश में कहीं भी अपना रिक्शा रोक देते हैं। इसी कारण यहां पर मिनटों में जाम लग जाता है और वाहन चींटियों की चाल में रेंगते नजर आते हैं। 

ठेले-खुमचे वालों को पुलिस का संरक्षण

शहर के मुख्य मार्गों पर लगने वाले ठेले-खुमचों ने जाम की समस्या औैर विकराल बना दिया है। कोरोना काल के बाद से इनकी संख्या में और भी अधिक इजाफा हो गया है। नगर निगम की टीम इन्हें जब भी हटाती है वे फिर से अपनी दुकानें लगा लेते हैं। क्योंकि उन्हें पुलिस का संरक्षण मिला रहता है। पुलिसकर्मियों की बदौलत ही उनका धंधा फल फूल रहा है और शहरवासियों को जाम की समस्या से आए दिन दो चार होना पड़ रहा है। 

बिना डीएल दौड़ा रहे ई-रिक्शा

शहर में कहीं भी जाने के लिए ई-रिक्शा आसानी से मिल जाता है। क्योंकि इधर तीन से चार वर्षों में इनकी संख्या में खासा इजाफा हुआ है। चालक बिना डीएल के ई-रिक्शा दौड़ा रहे हैं। यह ई-रिक्शा आए दिन जाम का मुख्य कारण ही नहीं बनते बल्कि दुर्घटनाओं के लिए भी सीधे-सीधे जिम्मेदार होते हैं। अब तो ई-रिक्शा वालों ने सामान भी ढोना शुरू कर दिया है, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। 

100 से भी अधिक शॉपिंग कांपलेक्स में पार्किंग सुविधा नहीं 

रिकाबगंज हो या गुदड़ीबाजार नियावां रोड, फतेहगंज नाका हो या चौक जैसा घना क्षेत्र। हर जगह धीरे-धीरे बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल व कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए हैं। कोई दो मंजिला है तो कोई तीन। हर शॉपिंग मॉल-कॉम्प्लेक्स यहां हादसों को दावत दे रहा है।

नियम कायदे की बात की जाए तो किसी भी मॉल और कॉम्प्लेक्स में नहीं मिलेगी। नगर में तकरीबन 100 से भी अधिक ऐसे शॉपिंग मॉल या कॉम्पलेक्स हैं जहां पार्किंग है ही नहीं। यहां आने वाले लोग बेतरतीब तरीके से वाहनों को खड़ा करते हैं, जिस कारण आए दिन सड़कों पर जाम लगता है। 

इस सम्बन्ध में अपर नगर आयुक्त शशिभूषण राय ने बताया कि नगर निगम बीच-बीच में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाता रहता है, लेकिन दुकानदार पुन: उसी स्थान पर पहुंच जाते हैं। वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन का प्रस्ताव शासन को गया है। जल्द ही प्रभावी कार्रवाई होगी। वहीं अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र सिंह का कहना है कि प्राधिकरण क्षेत्र काफी बड़ा है। जूनियर इंजीनियर्स के पास काम का लोड बहुत है। मास्टरप्लान शासन को भेजा गया है। उसके आते ही कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। 

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