नेपाल चुनाव

नेपाल चुनाव

भारत और नेपाल दुनिया के सबसे करीबी पड़ोसी देश हैं। नेपाल की राजनीति और वहां के चुनावों के दौरान इंडिया फैक्टरने आम तौर पर बड़ी और प्रभावी भूमिका निभाई है। वहां संघीय संसद और सात प्रांतीय विधानसभाओं की सीटों के लिए रविवार को मतदान हुआ था। मतगणना सोमवार को शुरू की गई। शुक्रवार तक प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की पार्टी नेपाली कांग्रेस (एनसी) संसदीय चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

शेर बहादुर देउबा भारत के क़रीबी माने जाते हैं। वर्ष 2015 में संविधान पारित होने के पश्चात राजनीतिक तौर पर उतार-चढ़ाव से गुजरने वाले इस हिमालयी गणराज्य में यह दूसरा लोकतांत्रिक चुनाव है। विश्लेषकों ने 2017 के चुनावों की तरह एक त्रिशंकु संसद की भविष्यवाणी की थी। उस समय देश की जनता ने ओली के सीपीएन-यूएमएल और प्रचंड की माओवादी पार्टी को शासन करने के लिए निर्णायक जनादेश दिया था।

सीमा के दोनों तरफ के लोग गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों से जुड़े हुए हैं। भू-रणनीतिक तौर पर देखा जाए तो नेपाल में भारत की मज़बूत और प्रभावी उपस्थिति है, क्योंकि नेपाल पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशा में भारत के साथ सीमा साझा करता है। वर्ष 1950 की भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि, दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर लंबे समय से विवाद का मुद्दा रही है। अक्सर देखने में आता है कि नेपाल अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं में भारत की व्यापक उपस्थिति को रोकने के लिए, कई बार विकास से जुड़ी ज़रूरतों और आर्थिक मदद के मामले में चीन की ओर देखता है।

नेपाल के बड़े राजनेताओं के लिए दोनों देशों के बीच सावधानी के साथ संतुलन बनाना प्रमुख चुनौतियों में से एक रहा है, जिसमें चीन का बढ़ता प्रभाव व्यापक तौर पर दिखाई देता है। कई क्षेत्रीय, भू-रणनीतिक मुद्दों के साथ ही जातीय-सांस्कृतिक घटनाओं ने पिछले कुछ वर्षों में भारत-नेपाल संबंधों पर असर डाला है। नेपाल के राजनीतिक गलियारों में कम्युनिस्ट ताक़तों की स्थिरता और मज़बूती सुनिश्चित करने के लिए चीन ने नेपाल की गठबंधन राजनीति में भी अपनी दख़लंदाज़ी की है। हालांकि देउबा के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और नेपाल के बीच संबंधों में सुधार हुआ। लेकिन ओली नेतृत्व वाला गठबंधन भारत विरोधी बयानबाजी करता रहा।

भारत के साथ भौगोलिक-सांस्कृतिक निकटता को देखते हुए नेपाल में लोकतांत्रिक मज़बूती और विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं में भारत की रचनात्मक भूमिका के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। इस प्रकार देखा जाए तो भी नेपाल की घरेलू राजनीति से इंडिया फैक्टर को दरकिनार करना बहुत मुश्किल है। ऐसे में नेपाल में स्थिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को स्थापित करने के लिए भारत का संयमित और ज़िम्मेदारी भरा नज़रिया पूरे क्षेत्र में सद्भाव को बढ़ाएगा।

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